• गीता के ये नौ सूत्र याद रखें, जीवन में कभी असफलता नहीं मिलेगी
    उज्जैन। आईआईएम से लेकर दूसरे मैनेजमेंट स्कूल्स तक में गीता को प्रबंधन की किताब के रुप में पहचान मिली है। गीता दुनिया के उन चंद ग्रंथों में शुमार है जो आज भी सबसे ज्यादा पढ़े जा रहे हैं और जीवन के हर पहलू को गीता से जोड़कर व्याख्या की जा रही है।कुरुक्षेत्र में युद्ध के मुहाने पर खड़ी कौरवों और पांडवों की सेना के बीच भगवान कृष्ण ने अर्जुन को जो ज्ञान दिया वो गीता माना गया है। आखिर गीता में ऐसा क्या है जो उसे इतना पढ़ा जाता है। इसके 18 अध्यायों के करीब 700 श्लोकों में हर उस समस्या का समाधान है जो कभी ना...
    August 19, 11:07[IST]
  • क्यों होता है कोई असफल, जानिए प्राचीन हिन्दू धर्मग्रंथ में बताई 1 खास वजह
    उज्जैन। दुनिया का हर धर्म जिंदगी को सुखी, शांत, अनुशासित और संयम से जीने की राह बताता है, रोजमर्रा की ज़िंदगी में अक्सर नजर आता है कि कई लोग धर्म की बातें तो करते हैं, लेकिन उनके कर्मों पर अधर्म का साया हावी होता है। यहां तक कि ऐसे लोग खुद प्रेम, सच्चाई, भलाई या अच्छाई के सबक सीखने या सुनने में रुचि नहीं लेते, किंतु दूसरों को धर्म की बातें अपनाने की सीख देने से नहीं चूकते। वहीं, कुछ लोग सबकुछ जानकर भी मजबूरी या मतलब की वजह से सही बातों को नजरअंदाज करते हैं। सीधे शब्दों में कहें तो ऐसे लोगों से धर्म की...
    April 9, 04:00[IST]
  • असफलता और दुःख का सबसे बड़ा कारण यह है...
    अधिकांश विवादों की जड़ में मैं होता है। अहंकार समाधान कम, समस्याएं ज्यादा पैदा करता है। सफल से सफल लोग अहंकारी होने पर भले ही असफल न हुए हों, पर अशांत जरूर हो गए और अशांति अपने आप में एक असफलता है। अहंकार कैसे उल्टे-उल्टे काम कराता है, पता ही नहीं लगने देता है कि आदमी कब हंस रहा है और कब रो रहा है। चलिए, रावण की सभा में चलते हैं। सुंदरकांड का वह दृश्य चल रहा था, जहां विश्वविजेता रावण के दरबार में हनुमानजी खड़े थे। कपिहि बिलोकि दसानन बिहसा कहि दुर्बाद।सुत बध सुरति कीन्हि पुनि उपजा हृदयं बिषाद।।...
    July 9, 12:51[IST]
  • भगवान भी खुश नहीं होता है ऐसी सफलता से...
    हर आदमी में कुछ भाव स्थायी होते हैं। सफलता पर खुशी, असफलता पर विषाद और कभी-कभी मन में ईष्र्या का भाव। अक्सर हम अपनी सफलता की राह पर खुद अपने मनोभावों के कारण ही रुकावटें खड़ी कर लेते हैं। होना यह चाहिए कि जब हम सफलता की राह पर तेजी से बढ़ रहे हों तो हर्ष, विषाद और ईष्र्या तीनों ही तरह के भावों को छोड़कर आगे बढ़ें। तभी जीवन का सच्चा आनंद और सफलता का सुख भोग सकेंगे। जब हम अपने लक्ष्य की ओर बढ़ रहे होते हैं तो हमारा प्रयास रहता है कि हमारी ऊर्जा पूरी तरह एकाग्र होकर सफलता अर्जित करने में लगी रहे, लेकिन...
    May 17, 12:45[IST]
  • अगर असफलता भी मिले तो यह बात ना भूलें...
    उत्सव मनाना और सौभाग्य को आमंत्रित करना लगभग एक जैसा है। सफलता का उत्सव तो बहुत लोग मनाते हैं, लेकिन असफल होने पर भी उत्सव की वृत्ति न छोड़ें। भारतीय संस्कृति उत्सवों की ही संस्कृति है।उत्सव का अर्थ यह नहीं होता कि खुशियों का बंटवारा कर लें, बल्कि उत्सव का अर्थ होता है, उत्साह को पैदा करना। सुख और दुख बांटो या न बांटो, उनके अपने फैलने के तरीके होते हैं, लेकिन उत्साह हमें भीतर से ही लाना पड़ेगा। उत्सव का अर्थ धूम-धड़ाका और भाग-दौड़ ही न मान लें।सच तो यह है कि जिस दिन आप खूब शांति से बैठ जाते हैं, उस...
    May 9, 01:53[IST]
  • रावण से सीखें, सफलता और शक्ति मिले तो क्या-क्या नहीं करें....
    आइए आज रावण से कुछ सीखते हैं। लोग अक्सर अपनी सफलता के नशे में क्या-क्या कर जाते हैं, जिसका परिणाम उन्हें भुगतना पड़ता है। रावण के साथ भी ऐसा ही कुछ होता था। उसकी गलतियां हमें सिखाती हैं कि अगर सफलता और शक्ति दोनों हमारे पास हो तो फिर हमें कैसे व्यवहार से बचना चाहिए। रावण ने युवा होते ही अपने भाइयों के साथ कठोर तप किया। ब्रह्मा को प्रसन्न किया। मनुष्य को छोड़ किसी के भी द्वारा नहीं मारा जाऊं ये वरदान मांग लिया, अमृत भी मिल गया। अब रावण अविजीत था। किसी से भी हार नहीं सकता था। शक्ति का साथ मिला तो...
    December 22, 01:47[IST]
विज्ञापन
 

बड़ी खबरें

 
 
 
 
 
 
 
 
 

रोचक खबरें

 
 
 
 
 
 
विज्ञापन
 

बॉलीवुड

 
 
 
 
 
 
 

स्पोर्ट्स

 
 
 
 
 
 

बिज़नेस

 
 
 
 
 
 

जोक्स

 
 
 
 
 
 

पसंदीदा खबरें

 
 
 
 
 
 

फोटो फीचर