
हम अक्सर इस उलझन में रहते हैं कि हमारा कर्तव्य क्या है। जो किताबी बातें हैं वो कर्तव्य है या जिन परिस्थितियों से हम गुजर रहे हैं, उसमें हमारी भूमिका कर्तव्य है। अधिकतर बार ऐसा होता है कि यह समझने में ही सारा वक्त गुजर जाता है कि हम करें क्या। क्या करें, क्या न करेें, क्या सही है और क्या गलत है, किस कार्य को करने से धर्म की, नैतिकता की और इंसानियत की मयार्दा का उल्लंघन होता है। यह जानने...
भक्ति भी एक युक्ति है। युक्ति यानी उपाय। परमात्मा को पाने का तरीका, ढंग या रीति। भगवान विशेष प्रयास से मिलते हैं। सुंदरकांड में युक्ति का एक प्रसंग आता है। विभीषण और हनुमानजी की चर्चा हो रही थी। हनुमानजी ने विभीषण से सीताजी का पता पूछा। तुलसीदासजी ने चौपाई लिखी - जुगुति बिभीषन सकल सुनाई। चलेउ पवनसुत बिदा कराई। । विभीषण ने (माता के दर्शन की) सब युक्तियां कह सुनाईं। विभीषण को...
जीवन का हर निर्णय पति-पत्नी को साझा रूप से लेना चाहिए। पति का कर्तव्य होता है कि वह हर फैसले में पत्नी की राय जरूर लें। यह सोच आधुनिक नहीं है। यह तो प्राचीनकाल से ही चली आ रही है। इसीलिए कहते हैं जहां नारियों को सम्मान दिया जाता है। वहां देवता निवास करते हैं। महाभारत की यह कथा हमें यही बता रही है कि गृहस्थी का हर फैसला पति-पत्नी दोनों को मिलकर लेना चाहिए ताकि जीवन सुखमय व...
दु:ख क्यों आते हैं, सुख कैसे मिलते हैं? ये सवाल हर इंसान के लिए पहेली है। कई बार अच्छा काम करते-करते भी परिणाम बुरा हो जाता है, कई बार हमारे साथ बुरा होने पर भी परिणाम सुखद होता है। हम परिणाम कैसा चाहते हैं, ये हमारे ऊपर ही निर्भर होता है। अगर सच से न हटें, अपना नैतिक पतन न होने दें तो रिजल्ट कभी हमारे खिलाफ नहीं होगा। महाभारत की एक कहानी हमें नैतिक बल का सबक सिखाती है। अगर हम अपने...
जीवन को सुखी और स्वस्थ बनाने वाले अष्टांग योग का पहला चरण है यम। योगशास्त्र में यम शब्द का अर्थ है समाज के प्रति हमारे कर्तव्य। जिस समाज में हम रहते हैं उसके प्रति हमारे कुछ कर्तव्य बताए गए हैं। इन्हीं कर्तव्यों को यम कहा जाता है। यम पांच प्रकार के होते हैं- - अहिंसा - सत्य - अस्तेय - ब्रह्मचर्य - अपरिग्रह यम का पहला चरण है अहिंसा। सामन्यत: अहिंसा का मतलब होता है किसी प्रकार की हिंसा ना...
सभी धर्मों में गरीबों की मदद करना हमारा कर्तव्य बताया गया है। जो भी व्यक्ति दान करने में समर्थ है उसे हमेशा जरूरतमंदों को सहयोग करना चाहिए। इसी वजह से अधिकांश घरों के लोग घर आए भिखारी को कभी खाली हाथ नहीं जाने देते। हिंदु धर्म में भिखारी को नारायण ही माना गया है। इन्हें दरिद्र नारायण दिया गया है। शास्त्रों अनुसार भगवान हमारी समय-समय पर परीक्षा लेते हैं। पुराने समय में भी कई ऐसे...
आज के समय में यह एक आम समस्या है कि जब भी किसी व्यक्ति को कोई काम या जिम्मेदारी दी जाती है तो वे कुछ न कुछ शिकायत करते ही रहते हैं। जीवन में किसी भी काम को पूरा करने के लिए लगन के साथ साथ समर्पण भाव का होना बड़ा जरूरी है। अगर व्यक्ति बिना शिकायत अपनी जिम्मेदारी को निभाए तो निश्चित ही अच्छे परिणाम सामने होंगे। और ईश्वर भी ऐसे लोगों का साथ जरूर देते हैं। बहुत पुरानी बात है, एक राज्य में...