जीवन मंत्र
  • जैन धर्म में रात्रि भोजन निषेध क्यों?
    जैन धर्म अहिंसा प्रधान है। धर्म का सारा जोर हिंसा रोकने पर है। वह चाहे किसी भी रूप में, किसी भी तरह की हिंसा क्यों न हो। रात्रि भोजन के त्याग के पीछे अहिंसा और स्वस्थ्य दो प्रमुख कारण है। यह वैज्ञानिक तथ्य है कि रात्रि में सूक्ष्म जीव बड़ी मात्रा में फैल जाते हैं। ऐसे में सूर्यास्त के बाद खाना बनाने से सूक्ष्म जीव भोजन में प्रवेश कर जाते हैं। खाना खाने पर ये सभी जीव पेट में चले जाते हैं।जैन धारणा में इसे हिंसा माना गया है। इसी कारण रात के भोजन को जैन धर्म में निषेध माना गया है। इसका एक कारण...
    April 28, 04:25[IST]
  • तिलक लगाना इसलिए हमारी संस्कृति, ये है कारण
    तिलक मस्तक का विशेषकर ललाट का सिंगार है। किसी भी इंसान का चेहरा देखने पर सबसे पहले नज़र उसके चेहरे के सबसे ऊपरी भाग यानी मस्तक या ललाट पर पड़ती है। यही कारण है कि पारंपरिक रूप से सिंगार प्रिय भारतीयों ने ललाट के सिंगार पर जोर दिया। इसके लिए तिलक के कई प्रकार अपनाए।स्त्रियों के लिए बिंदी रूप में पुरुषों के लिए अलग-अलग तरह के तिलक के रूप में। दरअसल तिलक आध्यात्म शांति के लिए किए गए प्रयास का भी प्रतीक है। यही कारण है कि किसी भी तरह का पूजन- पाठ या शुभारंभ करने पर तिलक लगाने को हमारी संस्कृति...
    April 22, 05:42[IST]
  • रविवार को सूर्य की पूजा से क्यों प्रसन्न होते हैं हनुमानजी
    एक बार की बात है माता अंजनि हनुमान जी को सुलाकर अपने कामों में व्यस्त हो गई। कुछ समय बाद उनकी नींद खुली तो वो भुख से परेशान होने लगे। तभी उनकी नजर आकाश में भगवान सूर्य नारायण पर पड़ी। उन्होंने सोचा कि यह जो लाल लाल सा दिखाई दे रहा है यह कोई मीठा फल है। एक ही झटके में वह भगवान सूर्य नारायण पर झपट पड़े। उसने उन्हें जल्दी से पकड़ कर अपने मुंह में डाल लिया। उसी समय तीनों लोकों में अंधेरा छा गया और भयानक त्रासदी हो गई। जीवन खत्म होने लगा। उस समय सूर्य ग्रहण चल रहा था, राहु सूर्य को ग्रसने के लिए उनके समीप...
    April 4, 03:25[IST]
  • जनेऊ धारण करने की परंपरा क्यों, ये हैं इसके कारण
    हिंदू धर्म में 16 संस्कारों को बहुत महत्वपूर्ण माना गया है, इन्हीं संस्कारों में से एक है जनेऊ संस्कार। क्या आप जानते हैं कि इस परंपरा का सिर्फ धार्मिक लिहाज से ही नहीं, बल्कि वैज्ञानिक लिहाज से भी बहुत महत्व है। साधारण भाषा में जनेऊ एक ऐसी परंपरा है, जिसके बाद ही कोई भी पुरुष पारंपरिक तौर से पूजा या धार्मिक कामों में भाग ले सकता है। प्राचीन काल में जनेऊ पहनने के बाद ही बालक को शिक्षा प्राप्त करने का अधिकार मिलता था। जनेऊ को उपवीत, यज्ञसूत्र, व्रतबन्ध, बलबन्ध, मोनीबन्ध और ब्रह्मसूत्र भी कहते...
    March 15, 12:37[IST]
  • वो 10 बातें जिनसे कोई भी स्त्री बन सकती है सीता की तरह आदर्श
    उज्जैन। सदियों से भारतीय संस्कृति में जब भी आदर्श या मर्यादा की बात होती है। रामायण के पात्रों को अनुकरणीय माना जाता है। श्रीराम की धर्मपत्नी माता सीता बेटी, मां और पत्नी के तौर पर पूरी स्त्री जाति के लिए आदर्श हैं। खासतौर पर आधुनिक परिवेश में पली-बढ़ी कईं युवतियां सीता से जुड़े कई ऐसे पहलू नहीं जानतीं, जो जिंदगी के हर दौर में उनके लिए बड़े ही उपयोगी हैं। ये इसलिए भी अहम है, क्योंकि वे भी जिंदगी के दौर में पत्नी या मां की भूमिका में होंगी। इसलिए आज हम बताने जा रहे हैं, माता सीता के बारे में वो...
    November 21, 08:56[IST]
  • मान्यता है खाने के समय ये चीजें याद रखने से कृपा करती हैं धनलक्ष्मी
    तस्वीरों का उपयोग सिर्फ प्रस्तुतिकरण के लिए किया गया है। उज्जैन।हिन्दू धर्म ग्रंथों में भोजन को अन्नदेव के नाम से पुकारा जाता है। कहते हैं प्रेम से भोजन ग्रहण करने पर आत्मा और मन की शुद्धि होती है। ग्रंथों में भगवान के दर्शन के लिए सबसे पहले अन्न को ही ब्रह्म रूप बताया गया है अन्नं ब्रह्म इति व्याजानात्। खैर ये बात तो हो गई धर्म ग्रंथों की लेकिन, आज के दौर में गुजरे जमाने की तुलना में भोजनशैली और व्यवस्था में बड़ा बदलाव आया है। जाहिर है इससे इंसान की सेहत, सोच, स्वभाव और व्यवहार भी प्रभावित...
    October 21, 08:19[IST]
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