• भारतीय संस्कृति के इस महत्वपूर्ण संदेश को जरूर समझिए...
    भारत की भीड़ को लेकर विदेशी लेखकों और चिन्तकों ने बहुत लिखा है। दरअसल भारतीय समूह की वृत्ति में जीते हैं और जल्दी अनुशासन छोड़ देते हैं। इस कारण हमारा समूह भीड़ में बदल जाता है। हमारी इसी भारतीय भीड़ का दुनियाभर में बहुत मजाक उड़ाया जाता है। अध्यात्म ने अधिक मनुष्यों की एक साथ उपस्थिति को अनुग्रह से जोड़ा है, जो बिल्कुल नई दृष्टि है। भारतीय संस्कृति ने जीवन में जो कुछ भी उपलब्ध हुआ है उसके प्रति आभार से भरे रहने के लिए अत्यधिक आग्रह किया। हमें जहां से जो भी मिला है उसके प्रति आभारी जरूर हों।...
    January 9, 12:10[IST]
  • पिछले जन्मों के संस्कारों का भी हो सकता है ये परिणाम...
    अक्सर पूछा जाता है कि दुख दूर करने के सरल उपाय क्या हैं? इसका उत्तर ढूंढ़ने में ही कुछ लोगों ने अपने आसपास और बड़े-बड़े दुख खड़े कर लिए हैं। हमारे शास्त्रों में भी आत्म-साक्षात्कार के जो साधन बताए गए हैं, वे दुख से मुक्ति के ही तरीके हैं। दुख की समझ ही दुख से मुक्ति है। इस समझदारी से आगमन होता है सुख, शांति और प्रसन्नता का। भारत की संस्कृति ने दुख को समझने के लिए उसे प्रारब्ध से जोड़ा है। प्रारब्ध यानी पूर्व संचित कर्म एवं संस्कारों का परिणाम। ये भोगकर ही पूरे होते हैं। इसी को दुख माना गया है।...
    July 9, 01:40[IST]
  • बच्चों को संस्कारवान बनाना है तो यह करें...
    शिक्षा को इस समय सत्संग से जोड़ा जाना चाहिए। आधुनिक शिक्षा और परंपरागत सत्संग का मेल असंतुष्ट, अशांत और असंयमित व्यक्तित्व के लिए जरूरी हो गया है। इस समय बच्चे इंटरनेट पर टिक गए हैं। सारी पढ़ाई परदे से खींची जा रही है। लैपटॉप और कंप्यूटर कितनी शिक्षा उगल रहे हैं, यह तो नहीं मालूम, लेकिन बच्चे उसमें किस तरह से डूब रहे हैं, यह हमें मालूम कर लेना चाहिए।एक अच्छा तरीका बुरे परिणाम दे रहा है। बच्चों को इसीलिए थोड़ा सत्संग से गुजारा जाना चाहिए। सत्संग के शब्दों में सुरक्षा है। सत्संग से गुजरने के बाद...
    December 24, 11:50[IST]
  • बच्चों को संस्कारवान बनाना है तो अभाव में भी रहना सिखाइए
    समाज और देश-दुनिया की महत्वपूर्ण इकाई है परिवार जबकि परिवार की शुरुआत होती है दाम्पत्य से। परिवार की सम्पत्ति होती है संतान। अगर यह कहें कि संतान के बिना समाज का कोई अस्तित्व ही नहीं है तो कोई अचरज नहीं है। अपना परिवार बढ़ाना या संतान का उत्पादन करना सिर्फ व्यक्तिगत ही नहीं बल्कि सामाजिक दृष्टि से भी उतना ही महत्वपूर्ण है। यह कार्य साधारण नहीं बल्कि बड़ा ही महत्वपूर्ण और चुनौती वाला है। किसी भी युवक या युवति को माता-पिता बनने की जिम्मेदारी क ो उठाने के लिये आगे आने से पहले हर तरह से तैयार हो...
    October 24, 02:56[IST]
  • अगर आप चाहते हैं कि आपके बच्चे हो संस्कारी तो...
    सभी माता-पिता चाहते हैं कि उनकी संतान कुछ ऐसा काम करे जिससे उनके परिवार का नाम रोशन हो। कहते हैं माता-पिता बालक को जैसे माहौल या पर्यावरण में रखते हैं बच्चे के संस्कार वैसे ही होते हैं। माता-पिता उसे जैसा मार्गदर्शन देते हैं वह उसी रंग में रंग जाता है। इसीलिए किसी मनौवैज्ञानिक ने ठीक ही कहा है अपने बच्चे को जन्म से पहले पांच वर्ष तक अपने पास रखो, फिर वह जन्मभर आपका रहेगा। इसीलिए जातकर्म संस्कार के अंर्तगत बालक को शहद व घी चटाने का या घी व शहद को मिलाकर सोने की शलाका से जीभ पर ऊं लिखने का वर्णन...
    July 1, 11:56[IST]
  • घर से किसी को भी खाली हाथ न जाने दें, क्योंकि
    हमारी भारतीय संस्कृति में मान्यता है अतिथि देवो भव:। हम अपने अतिथियों को देवतुल्य मानते हैं और अपनी शक्ति के अनुसार उनके स्वागत सत्कार और कोई क मी नहीं छोड़ते। अतिथियों के साथ ठीक से व्यवहार करना, उनकी आवश्यकताओं को समझ कर उनको पूरा करने के लिये प्रयत्नशील रहना चाहिए। उनके मान सम्मान और उनकी सुख सुविधा का ध्यान रखना चाहिए। उनके लिये यथा सम्भव एक सुखद और सौहाद्र्रपूर्ण वातावरण उपलब्ध करवाना चाहिए। इसी प्रकार के संस्कार बचपन से हमें हमारे माता पिता देते हैं। हमारे यहां प्राचीनकाल से ही यह...
    June 24, 02:14[IST]
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