
आमतौर पर इतना ही माना जाता है कि शुद्ध आक्सीजन हमारे स्वास्थ्य के लिये आवश्यक और फायदेमंद होती है। लेकिन शुद्ध वायु का प्रभाव हमारे बाहरी शरीर और स्वास्थ्य पर ही नहीं पड़ता बल्कि आंतरिक स्वास्थ्य और मन पर भी वायु का काफी गहरा प्रभाव पड़ता है।
यदि आप शुद्ध वायु ग्रहण नहीं कर रहे हैं तो शरीर का तेजी से क्षरण कर रहे हैं। यदि आपकी श्वास में रुकावट है तो सभी अंगों पर इसका बुरा प्रभाव पड़ता है। श्वास-प्रश्वास से शरीर की मुख्य नाडिय़ों का संचालन होता है। वे प्रमुख नाडिय़ां तीन हैं। पहली इड़ा, दूसरी पिंगला और तीसरी सुसुम्ना। इन तीनों नाडिय़ों से शरीर की सारी नाडिय़ां जुड़ी हंै जिनमें कि सारे शरीर में रक्त का संचरण होता है।
इन तीनों नाडिय़ों में ठीक-ठीक संतुलन हो तो व्यक्ति के शरीर में आरोग्य, बल, शांति तथा लम्बी आयु प्रदान करने की क्षमता है। यह तीनों नाडिय़ां शरीर की समस्त रक्त नलियों, कोशिकाओं आदि का केंद्र हैं।
योगी, जीनियस या अतिमानवीय क्षमताओं से सम्पन्न व्यक्तियों की सफलता या विशेषता के पीछे भी इन महत्वपूर्ण नाडिय़ों का हाथ होता है। भविष्य की घटनाओं के विषय में पहले से जान जाना, किसी के मन की बात जान लेना...जैसी आश्चर्यजनक क्षमताओं के पीछे भी इन नाडिय़ों की अहम् भूमिका होती है।
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