जानिए हवा, प्राण और आपकी उम्र के बीच, क्या कनेक्शन है?

 
Source: धर्म डेस्क, उज्जैन   |   Last Updated 1:42 PM [IST](06/07/2011)
 
 
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योग, आसन, प्राणायाम... ये कुछ ऐसे शब्द हैं जिन्हें आज पूरी दुनिया जानती है, खाशकर भारत का तो बच्चा-बच्चा इन बातों से अच्छी तरह से वाकिफ है। लेकिन योग प्राणायाम से जुड़ी कुछ ऐसी बातें भी होती हैं, जो गुप्त भी हैं साथ ही साथ बेहद कीमती भी। आइये जाने योग-प्राणायाम से जुड़ी कुछ ऐसी ही अहम् बातें-

वायु, प्राण, व्यान, अपान, समान आदि वायुओं से मन को रोकने और शरीर को साधने का अभ्यास करना ही असल में प्राणायाम है। संक्षिप्त में कहें तो प्राणों को आयाम देना ही प्राणायाम है। वेद और योग में आठ प्रकार की वायु का वर्णन मिलता है, जिनमें जीव विचरण करता है।

जड़ यानी पत्थर, पेड़, पहाड़ या हमारा शरीर इसे जड़ कहते हैं। यह जड़ संचालित होता है जल, वायु, और अन्न से। सभी में सबसे महत्वपूर्ण है वायु। भोजन कुछ दिन ना भी करें तो चल सकता है और कुछ घंटे तक बगैर पानी के भी चलेगा, लेकिन वायु की तो व्यक्ति को प्रतिपल और प्रतिक्षण अनिवार्य जरूरत होती है।

इस वायु को ही प्राणशक्ति कहते हैं। सभी में यह प्राणशक्ति समाई हुई है। शरीर और मन के बीच की कड़ी है प्राण। प्राणों से ही शरीर और मन को शक्ति मिलती है। प्राण को आयु भी कहते हैं मतलब कि प्राणायाम से दीर्घायु हुआ जा सकता है।

...और परमात्मा की कृपा देखिये कि जीवन के लिये सबसे ज्यादा जरूरी वायु को उसने सबसे ज्यादा सुलभ बना रखा है। जिस हवा के बगैर हम 1 मिनट भी जिंदा नहीं रह सकते उसे भगवान ने बिना किसी कीमत के ही हमें भरपूर मात्रा में दिया है।




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