Home» Jeevan Mantra »Dharm »Upasana » Ups_worship Lord Surya By These Mantra Give Power And Wisdom

रविवार को इन मंत्रों से सूर्य उपासना दे तेज दिमाग और शक्ति

धर्म डेस्क. उज्जैन | Jun 25, 2011, 13:54PM IST
रविवार को इन मंत्रों से सूर्य उपासना दे तेज दिमाग और शक्ति

सूर्य कालचक्र का आधार है। इसलिए सरल शब्दों में समझें तो बुरे समय और स्थिति से बचना है तो सूर्य उपासना बहुत ही श्रेष्ठ उपाय है। शास्त्रों के मुताबिक सूर्य साक्षात देवता है। व्यावहारिक रूप से भी देखें तो सूर्य उदय से लेकर अस्त होने तक ऊर्जा व रोशनी से तन, मन को स्वस्थ्य व सुखी रखता है।

सूर्य की उपासना भी स्वास्थ्य, बुद्धि, यश, सम्मान, शक्ति, बुद्धि देने वाली मानी गई है। रविवार का दिन सूर्य देव की उपासना का विशेष दिन होता है। ज्योतिष में सूर्य को मस्तिष्क का स्वामी भी माना गया है। इसलिए कुण्डली में सूर्य के अच्छे या बुरे प्रभाव बुद्धि और विवेक पर असर डालते हैं, जिससे जीवन में लाभ-हानि नियत होती है।

अगर आप सुखी और स्वस्थ्य जीवन चाहते हैं या सूर्य दोष दूर कर बुद्धि व यश-सम्मान की कामना है तो यहां बताए जा रहे विशेष सूर्य मंत्रों की स्तुति का पाठ रविवार के दिन यहां बताई जा रही सरल विधि से करें -

- प्रात: स्नान कर भगवान सूर्य देव को तांबे के जल भरे कलश में गंध, अक्षत, फूल डालकर अर्घ्य दें।

- इसके बाद सूर्य की ओर मुख कर नीचे लिखी सूर्य मंत्र स्तुति का पाठ शक्ति, सद्बुद्धि, स्वास्थ्य और सम्मान की कामना से करें -

आदि देव: नमस्तुभ्यम प्रसीद मम भास्कर। दिवाकर नमस्तुभ्यम प्रभाकर नमोस्तुते॥

सप्त अश्व रथम आरूढम प्रचंडम कश्यप आत्मजम। श्वेतम पदमधरम देवम तम सूर्यम प्रणमामि अहम॥

लोहितम रथम आरूढम सर्वलोकम पितामहम। महापापहरम देवम त्वम सूर्यम प्रणमामि अहम॥

त्रैगुण्यम च महाशूरम ब्रह्मा विष्णु महेश्वरम। महा पाप हरम देवम त्वम सूर्यम प्रणमामि अहम॥

बृंहितम तेज: पुंजम च वायुम आकाशम एव च। प्रभुम च सर्वलोकानाम तम सूर्यम प्रणमामि अहम॥

बन्धूक पुष्प संकाशम हार कुण्डल भूषितम। एक-चक्र-धरम देवम तम सूर्यम प्रणमामि अहम॥

तम सूर्यम जगत कर्तारम महा तेज: प्रदीपनम। महापाप हरम देवम तम सूर्यम प्रणमामि अहम॥

सूर्य-अष्टकम पठेत नित्यम ग्रह-पीडा प्रणाशनम। अपुत्र: लभते पुत्रम दरिद्र: धनवान भवेत॥

आमिषम मधुपानम च य: करोति रवे: दिने। सप्त जन्म भवेत रोगी प्रतिजन्म दरिद्रता॥

स्त्री तैल मधु मांसानि य: त्यजेत तु रवेर दिने। न व्याधि: शोक दारिद्रयम सूर्यलोकम गच्छति॥

- अंत में सूर्यदेव की धूप, दीप से आरती कर दीपज्योति ग्रहण करें और घर में घुमाएं।

अगर आपकी धर्म और उपासना से जुड़ी कोई जिज्ञासा हो या कोई जानकारी चाहते हैं तो इस आर्टिकल पर टिप्पणी के साथ नीचे कमेंट बाक्स के जरिए हमें भेजें।


आपके विचार
 
अपने विचार पोस्ट करने के लिए लॉग इन करें

लॉग इन करे:
या
अपने बारे में बताएं
 
 

दिखाया जायेगा

 
 

दिखाया जायेगा

 
कोड:
2 + 7

 
विज्ञापन
 
Ethical voting

बड़ी खबरें

रोचक खबरें

विज्ञापन

बॉलीवुड

स्पोर्ट्स

बिज़नेस

जोक्स

पसंदीदा खबरें

फोटो फीचर

 
Email Print Comment