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जानें, क्यों नाचते हैं नाग ..?

धर्म डेस्क. उज्जैन | Aug 02, 2011, 15:32PM IST
जानें, क्यों नाचते हैं नाग ..?

नाग पूजा उसी प्रकृति पूजा का ही अंग है, जिसमें रोम-रोम में ईश्वर का वास माना जाता है। ईश्वर का यह प्राकृतिक स्वरूप भगवान शिव के रूप में पूजनीय है। यही कारण है कि सावन माह में आने वाली नागपंचमी (4 अगस्त) की शुभ घड़ी पर नाग पूजा साक्षात् शिव पूजा भी मानी जाती है।

वैसे भी भगवान शंकर को नागों का अधिपति माना गया है। नाग उनका आभूषण माने गऐ हैं। इसलिए नाग पूजा शुभ और मंगलकारी मानी गई है। दरअसल, नाग पूजा में पेड़-पौधों, जल, वायु, अन्न, जीव-जन्तुओं आदि के द्वारा मानव पर मेहरबान प्रकृति के सम्मान और उसके साथ तालमेल बैठाकर सुखी जीवन जीने का संदेश है।

बहरहाल, श्रद्धा और आस्था से भरपूर इस धार्मिक परंपरा के दौरान एक रोचक बात भी देखी जाती है। जिसमें नाग पूजा कर बीन बजाकर नागों को नचाया जाता है। माना जाता है नाग प्रसन्न होकर नाचते हैं। जबकि नाग के नृत्य के पीछे जुड़े व्यावहारिक कारण कुछ ओर होते हैं। आखिर क्या है नाग नृत्य के पीछे छुपा विज्ञान? जानते हैं -

असल में नागों के इंसान की तरह कर्णछिद्र सरल शब्दों में कहें तो कान नहीं होते। बल्कि उनकी दृष्टि बहुत तेज होती है। साथ ही धरती और हवा में होने वाले कंपन और हलचल को भी वह त्वचा और नाक के द्वारा ली जाने वाली श्वांस द्वारा पकड़ लेते हैं। इस तरह उनकी आंखें व अन्य अंग कान का कार्य  करते हैं।

यही कारण है कि जब सपेरे द्वारा बीन बजाने के दौरान घुमाई भी जाती है तो सांप उसकी आवाज सुनकर नहीं, बल्कि उसे देखकर इधर-उधर हिलता है। जिसे श्रद्धा और आस्था से यह मान लिया जाता है कि सर्पदेवता प्रसन्न होकर नृत्य कर रहे हैं।

सार यही है कि सर्प पूजा से जुड़े प्रकृति संरक्षण के मूल भाव व संदेश को समझ व्यवहार में अपनाए न कि मात्र धार्मिक क र्मकाण्ड की खानापूर्ति कर इस उत्सव की इतिश्री कर लें।

अगर आपकी धर्म और उपासना से जुड़ी कोई जिज्ञासा हो या कोई जानकारी चाहते हैं तो इस आर्टिकल पर टिप्पणी के साथ नीचे कमेंट बाक्स के जरिए हमें भेजें।










  
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