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शनि, राहु, हनुमान दे इन पांच सुखों का आनंद

धर्म डेस्क. उज्जैन | Oct 22, 2010, 20:15PM IST
शनि, राहु, हनुमान दे इन पांच सुखों का आनंद

हर व्यक्ति जीवन में अनेक रुपों में सुख भोगता है। कभी अपने तो कभी परिवार के सुख की लालसा जन्म से लेकर मृत्यु तक साथ चलती है। धर्म में आस्था रखने वाला व्यक्ति इन सुखों को पाने या कमी न होने के लिए देवकृपा की हमेशा आस रखता है। हर गृहस्थ या अविवाहित जीवन में बुद्धि, ज्ञान, संतान, भवन, वाहन इन पांच सुखों की कामना जरूर करता है।



यहां इन सुखों का खासतौर पर जिक्र इसलिए किया जा रहा है, क्योंकि ज्योतिष विज्ञान के अनुसार जब किसी व्यक्ति की जन्मकुण्डली में शनि-राहु की युति बन जाती है, तब इन पांच सुखों को जरूर प्रभावित करती है। जन्म कुण्डली में यह पांच सुख चौथे और पांचवे भाव नियत करते हैं। खासतौर पर जब जन्मकुण्डली में शनि-राहु की युति चौथे भाव में बन रही हो। तब वह पांचवे भाव पर भी असर करती है। हालांकि दूसरे ग्रहों के योग और दृष्टि अच्छे और बुरे फल दे सकती है। लेकिन यहां मात्र शनि-राहु की युति के असर और उसकी शांति के उपाय पर गौर किया जा रहा है।



हिन्दू पंचांग में शनिवार का दिन न्याय के देवता शनि की उपासना कर पीड़ा और कष्टों से मुक्ति का माना जाता है। यह दिन शनि की पीड़ा, साढ़े साती या ढैय्या से होने वाले बुरे प्रभावों की शांति के लिए भी जरुरी है। किंतु शनिवार का दिन एक ओर क्रूर ग्रह राहु दोष की शांति के लिए भी अहम माना जाता है। राहु के बुरे प्रभाव से भयंकर मानसिक पीड़ा और अशांति हो सकती है।



इसी तरह यह दिन रामभक्त हनुमान की उपासना से संकट, बाधाओं से मुक्त होकर ताकत, अक्ल और हुनर पाने का माना जाता है। यही नहीं श्री हनुमान की उपासना करने वाले व्यक्ति को शनि पीड़ा कभी नहीं सताती है। ऐसा शास्त्रों में स्वयं शनिदेव की वाणी है। इसी तरह राहु का कोप भी हनुमान उपासना करने वालों को हानि नहीं पहुंचाता।



अगर आप इन पांच सुखों को पाने में परेशानी महसूस कर रहे हो या कुण्डली में बनी शनि-राहु की युति से प्रभावित हो, तो यहां जानते हैं सुखों का आनंद लेने के लिए हनुमान भक्ति और शनि-राहु युति की दोष शांति के सरल उपाय -



- शनिवार की सुबह यथासंभव जितना जल्दी हो सके उठकर स्नान करें। स्वच्छ वस्त्र पहनें।

- एक शुद्ध जल या उसमें गंगाजल मिलाकर घर के समीप या मंदिर में स्थित पीपल के पेड़ में जाकर चढ़ाएं। पीपल की सात परिक्रमा करें। अगरबत्ती, तिल के तेल का दीपक लगाएं। समय होने पर गजेन्दमोक्ष स्तवन का पाठ करें। इस बारे में किसी विद्वान ब्राह्मण से जानकारी ले सकते हैं।

- इसी तरह किसी मंदिर के बाहर बैठे भिक्षुक को तेल में बनी वस्तुओं जैसे कचोरी, समोसे, सेव, पकोड़ी यथाशक्ति खिलाएं या उस निमित्त धन दें।

- श्री हनुमान की प्रतिमा के सामने एक नारियल पर स्वस्तिक बनाकर अर्पित कर दें।



समयाभाव होने पर यह तीन उपाय न केवल आपकी मुसीबतों को कम करते हैं,बल्कि जीवन को सुखी और शांति से भर देते हैं।



- किंतु समय होने पर शनिवार के दिन शनिदेव, श्री हनुमान और राहू पूजा की पंचोपचार पूजा और विशेष सामग्रियों को अर्पित करें।

- शनि मंत्र ऊँ शं शनिश्चराये नम: और राहू मंत्र ऊँ रां राहुवे नम: का जप करें। हनुमान चालीसा का पाठ भी बहुत प्रभावी होता है।

- शनि मंदिर में जाकर लोहे की वस्तु चढाएं या दान करें, तिल का तेल का दीप जलाएं। तेल से बने पकवानों का भोग लगाएं।

- श्री हनुमान को गुड़, चना या चूरमें का भोग लगाएं। सिंदूर का चोला चढाएं।

- राहु की प्रसन्नता के लिए तिल्ली की मिठाईयां और तेल का दीप लगाएं।




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