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तीन बंध जिनसे जागती है कुंडलिनी

धर्म डेस्क. उज्जैन | Nov 16, 2010, 11:42AM IST
तीन बंध जिनसे जागती है कुंडलिनी

मुद्राओं के अभ्यास के बिना योग में सिद्धि प्राप्त नहीं होती और मुद्राओं की सिद्धि के बिना कुण्डलिनी जागृत नहीं होती। मुद्राएं नाडिय़ों की बीमारियां दूर करने में काफी फायदेमंद होती हैं।

असंतुलित खान-पान और अव्यवस्थित दिनचर्या के चलते हमारे शरीर का सिस्टम बिगड़ जाता है। जिससे कई बीमारियां होने की संभावना बन जाती है। हमारे शरीर की कार्यप्रणाली सुधारने के लिए योगिक मुद्राओं का सहारा लिया जा सकता है। इन्हीं मुद्राओं में तीन प्रकार के बंध होते हैं। ये मल-विसर्जन की क्रिया को नियमित तो करते ही हैं साथ ही कुछ चक्रों पर भी उनका अद्भुत प्रभाव पड़ता है। यह तीन बंध इस प्रकार हैं-

- उड्डीयान बंध

- जालंधर बंध

- मूल बंध


यह तीनों बंध हठयोग से संबंधित हैं। यह काफी सरल होने के साथ-साथ बहुत लाभदायक भी है। इनके नियमित अभ्यास से हमारा स्वास्थ्य हमेशा ठीक रहता है। मानसिक शक्ति बढ़ती है। पाचन तंत्र सही रहता है। यह तीनों कुण्डलिनी जागरण में सहायक होते हैं।






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