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रतिक्रिया: रात्रि का प्रथम प्रहर ही श्रेष्ठ क्यों?

शशिकांत साल्वी. उज्जैन | Jul 17, 2010, 09:43AM IST
 
 


सनातन धर्म में रतिक्रिया के संबंध में भी कई आवश्यक निर्देश दिए हैं। विवाह उपरांत रतिक्रिया को महत्वपूर्ण माना गया है। रतिक्रिया के माध्यम से ही संतान की उत्पत्ति होती है।

आपकी संतान कैसी होगी? यह रतिक्रिया का समय निर्धारित करता है। इस संबंध में धर्म शास्त्रों में उल्लेख है कि रात्रि का प्रथम प्रहर रतिक्रिया के लिए सर्वश्रेष्ठ है। ऐसा माना जाता है कि रात्रि के प्रथम पहर में कि गई रतिक्रिया से उत्पन्न होने वाली संतान को शिव का आशीर्वाद प्राप्त होता है और वह संतान पूर्णत: धार्मिक, माता-पिता की आज्ञा का पालन करने वाली, भाग्यवान, दीर्घायु होती है।

मान्यता है कि प्रथम प्रहर के पश्चात राक्षस गण पृथ्वी भ्रमण पर निकलते हैं और उस दौरान की गई रतिक्रिया से उत्पन्न होने वाली संतान राक्षसों के समान ही गुण वाली होती है। वे संतान अति कामी, बुरे गुणों वाली, माता-पिता का अनादर करने वाली, भाग्यहीन और बुरे व्यसनों में फंसने वाली होती हैं।

रात्रि का प्रथम प्रहर रात 12 बजे तक माना जाता है। वैदिक धर्म के अनुसार इसी समय को रतिक्रिया के लिए सर्वश्रेष्ठ माना गया है। इसके अतिरिक्त किसी अन्य समय में रतिक्रिया करने वाले युगल कई प्रकार के शारीरिक, मानसिक और आर्थिक दुख भोगते हैं। रात्रि 12 बजे के बाद रतिक्रिया करने से कई प्रकार की बीमारियां घेर लेती हैं। जैसे अनिंद्रा, मानसिक तनाव, थकान अन्य शारीरिक बीमारियां आदि। साथ ही उन्हें देवी-देवताओं की कृपा प्राप्त नहीं होती।

 
 
 

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