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स्वयं की शक्ति जागृत करने का समय है नवरात्र

धर्म डेस्क. उज्जैन | Oct 12, 2010, 19:07PM IST
स्वयं की शक्ति जागृत करने का समय है नवरात्र

नवरात्र शक्ति की उपासना करने के लिए सबसे बेहतर समय होता है। इस दौरान लोग कई प्रकार की साधनाएं करते हैं। मूलत: नवरात्र शरीर में स्थित विभिन्न चक्रों (शक्तियों) को जाग्रत करने का समय माना जाता है।

नवरात्र में पहले दिन की शक्ति है शैलपुत्री। इनकी स्तुति से मूलाधार चक्र में बीज रूप में पड़ी चेतना शक्ति में हलचल होती है।

द्वितीय दिन की शक्ति है ब्रह्मïचारिणी, जिसके जागरण से मूलाधार चक्र की ब्रह्मïशक्ति ऊपर की ओर उठती है।

तीसरे दिन की शक्ति है चंद्रघंटा, इनका स्मरण करने से साधक को घंटों की टंकार की ध्वनि अनुभूत होती है और इसी के साथ शक्ति का स्वाधिष्ठïन चक्र की ओर जाती है।

चौथे दिन की शक्ति कूष्माण्डा है। इनकी स्तुति से जागरण से मणिपूरक चक्र में स्पंदन होता है।

पांचवें दिन की शक्ति स्कन्दमाता है, जिसके जागरण से मणिपूरक चक्र जो कि नाभि में स्थित है, में शक्ति का उद्भव होता है।

छठवें दिन की शक्ति कात्यायिनी है। इनके जागरण से शरीर में स्थित सभी बुराइयों का विनाश होता है।

सातवें दिन की शक्ति है कालरात्रि। यह माता का विकराल स्वरूप है। इनकी आराधना से से साधक प्राणों को हृदयचक्र में पुष्टï करता है एवं शक्ति का प्रवेश अनाहत चक्र में होता है, जो वक्ष में स्थित है।

आठवें दिन की शक्ति महागौरी है। इनके जागरण से साधक संसार के सभी बुराइयों से मुक्त होकर विशुद्धचक्र में प्रवेश करता है, जो कि साधक के गले में स्थित है।

नवें दिन की शक्ति सिद्धिदात्री है अर्थात समस्त सिद्धियों व मोक्ष को देने वाली। इसकी जागृति से साधक मूलाधार चक्र से बीज रूप में पड़ी आत्मशक्ति को समस्त चक्रों का भेदन करते हुए आज्ञा चक्र में स्थित करता है, जिससे वह कई आलौकिक शक्तियों का स्वामी बन जाता है।


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