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भूत-पिशाच मार भगावे - श्री मेंहदीपुर बालाजी

Dharm desk, Ujjain | Apr 16, 2010, 19:36PM IST
भूत-पिशाच मार भगावे - श्री मेंहदीपुर बालाजी

श्री मेंहदीपुर बालाजी मंदिर राजस्थान के दौसा जिले में स्थित है। मूलत: यह मंदिर पवनपुत्र हनुमान का मंदिर ही है। यहां श्री प्रेतराज सरकार, प्रेतराजा या आत्माओं के राजा के नाम से जाने जाते हैं। लोकमान्यता है कि पूर्व काल में श्री बालाजी राजस्थान की अरावली पहाडिय़ों में बुरी आत्माओं के नाश हेतु प्रकट हुए। यह स्थान बुरी आत्माओं, काला जादू आदि से पीडि़त लोगों की कष्टों से छुटकारा दिलाने के लिए प्रसिद्ध है। पीडि़त लोग यहां आकर श्री प्रेतराज सरकार यानि मेंहदीपुर के बालाजी और श्री भैरवनाथ के दर्शन कर अपनी पीड़ा से मुक्ति के लिए प्रार्थना और पूजा करते हैं। भक्तों और श्रद्धालुओं की आस्था और विश्वास है कि श्री बालाजी दण्डाधिकारी के रुप में बुरी आत्माओं, भूत, चुडैल को दण्ड देकर भयंकर मानसिक और शारीरिक कष्ट भोग रहे व्यक्ति को पीड़ामुक्त कर देते हैं। मेंहदीपुर बालाजी का मंदिर श्री हनुमान की अदालत माना जाता है। इस मंदिर के साथ ही यहां पूजा गृह, भैरव मंदिर और राम दरबार मंदिर के दर्शन का भी महत्व है। जहां दु:खों से छुटकारा पाने के लिए जनसैलाब उमड़ता है।



यहां श्री मेंहदीपुर बालाजी के प्रति श्रद्धा और विश्वास के कारण अनेक धार्मिक कर्म और गतिविधियां चलती रहती है। यहां दान के साथ गरीब, अनाथ, बेसहारों, कमजोर और असक्षम लोगों के लिए भोजन कराया जाता है। गायों के लिए चारा और अन्य भूखे-प्यासे पशु-पक्षियों के लिए दाना-पानी उपलब्ध कराया जाता है।



राजस्थान में मेंहदीपुर बालाजी का मंदिर श्री हनुमान का बहुत जाग्रत स्थान माना जाता है। लोगों का विश्वास है कि इस मंदिर में विराजित श्री बालाजी अपनी देवीय शक्ति से बुरी आत्माओं से छुटकारा दिलाते हैं। इसमें मंदिर में हजारों भूत-पिशाच से त्रस्त लोग प्रतिदिन दर्शन और प्रार्थना के लिए यहां आते हैं, जिन्हें स्थानीय लोग संकटवाला कहते हैं। भूतबाधा से पीडि़त के लिए यह मंदिर अपने ही घर के समान हो जाता है और श्री बालाजी ही उसकी अंतिम उम्मीद होते हैं। यहां श्री बालाजी के सेवा और पूजा करने वाले मंहत सभी पीडि़तों को भूत बाधा से मुक्त करने के लिए सारी श्री बालाजी के सामने सभी उपचार करते हैं। इसके लिए वह पवित्रता का पूरा ध्यान रखते हैं। वह सादा और शाकाहार करते हैं। कभी भी इस कार्य को लोक कल्याण की भावना के साथ करते हैं।



यहां पीड़ाओं से मुक्त होने के लिए आस्था और विश्वास की ताकत को देखा जा सकता है। यहां पर प्रेतबाधाओं से लोगों को मुक्त करने के लिए अनेक असाधारण और असामान्य, कष्टप्रद भौतिक चिकित्सा के उपाय देखें जा सकते हैं। किंतु उनका उद्देश्य मात्र व्यक्ति के दु:ख और कष्टों से मुक्ति होती है। इनमें कुछ उपायों में प्रेत बाधा से भयंकर पीडि़त व्यक्ति के शरीर पर हाथ, पैर और छाती पर भारी पत्थर रखे जाते हैं। बहुत ज्यादा पीडि़त और हिंसक व्यक्ति को मंदिर परिसर में ही जंजीरों से भी बांधा जाता है।



यह सारे तरीके पहली नजर में विभत्स और असहनीय दिखाई देते हैं। किंतु प्रेतबाधा से मुक्त होने के लिए हजारों श्रद्धालुओं की इस तरह के तरीकों और उपचारों पर विश्वास और श्रद्धा है। श्रद्धा को ही देव शक्ति से कोई भी फल पाने की सबसे बड़ी ताकत मानी जाती है। हालांकि चिकित्सा विज्ञान भूत प्रेत से ग्रसित व्यक्ति को रोगी मानता है। इसलिए श्री मेंहदीपुर बालाजी में भूतप्रेत से मुक्त करने के लिए अपनाए गए शारीरिक कष्ट देने वाले उपायों को अंध विश्वास मानता है। किंतु श्री मेंहदीपुर बालाजी और इस स्थान पर विश्वास और अगाध श्रद्धा रखने वालों की असंख्य है और उनके अनुभव के अनुसार श्री मेंहदीपुर बालाजी की शक्ति अद्भूत, अलौकिक है और भौतिक संसार से परे है।



अन्य दर्शनीय स्थान -



श्री मेंहदीपुर बालाजी में अन्य दर्शनीय देवस्थान भी हैं। जिनमें नीलकंठ महादेव मंदिर, माताजी का मंदिर, के लादेवी का मंदिर और प्रताप वाटिका प्रमुख है। पहुंच के संसाधन -



श्री मेंहदीपुर बालाजी दर्शन हेतु पहुंचने के लिए वायुमार्ग, रेलमार्ग और सड़क परिवहन की सुविधा उपलब्ध है।



वायुमार्ग - श्री मेंहदीपुर बालाजी पहुंचने के लिए सबसे नजदीकी हवाई अड्डा सांगानेर, जयपुर में है। जिसकी यहां से दूरी लगभग ११३ किलोमीटर है।



रेल मार्ग - श्री बालाजी के दर्शन हेतु आने के लिए निकटतम रेल्वे स्टेशन बांदीकुई है। जिसकी यहां से दूरी ४० किलोमीटर है।



सड़क मार्ग - मेहंदीपुर बालाजी का मंदिर उत्तर भारत के सभी मुख्य शहरों से सड़क मार्ग द्वारा जुड़ा है। आगरा और जयपुर राजमार्ग पर तेज गति की बस सेवा उपलब्ध है। निजी वाहन द्वारा भी दिल्ली से अलवर-महवा या मथुरा-भरतपुर-महवा सड़क मार्ग से होते हुए श्री मेहंदीपुर बालाजी पहुंचा जा सकता है।



ऐसा आचरण करें श्री बालाजी मंदिर में -



- मंदिर में अन्य भूत-प्रेत पीडि़त लोगों के साथ अच्छा व्यवहार करें। - मंदिर में स्नान कर, स्वच्छ कपड़े पहनकर, पंक्ति में लगकर ही प्रवेश करें। - बच्चों को ऐसे सुरक्षित स्थान पर रखें, जहां शौच आदि की व्यवस्था हो, ताकि मंदिर की स्वच्छता भी बनी रहे और बच्चे भयभीत न हो। मंदिर में झूठ बोलना या कोलाहल करने की अनुमति नहीं है। - मंदिर के केन्द्रस्थान में भगवान को चढ़ाने के लिए प्रसाद पुजारी को ही दें। - भूत प्रेत से बाधित व्यक्ति और महिलाओं द्वारा दर्शन हेतु मंदिर में आने पर किसी को साथ होना आवश्यक है। - मंदिर में आपत्तिजनक स्थिति में आना और धूम्रपान करना प्रतिबंधित है। - भूतप्रेत बाधा से मुक्ति श्री बालाजी की कृपा और आशीर्वाद से हो सकती है। इसके लिए मंदिर ट्रस्ट के जिम्मेदार प्रतिनिधि से संपर्क करें न ही किसी साधु,संन्यासी या फकीर के झांसे में आए।





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