
नवरात्रि में यहां की गई पूजा कभी निष्फल नहीं होती

भारत में देवी मां के अनेक सिद्ध मंदिर हैं। इन्हीं में से एक है रतनपुर स्थित मां महामाया देवी का मंदिर। मान्यता है कि महामाया देवी का पहला अभिषेक और पूजन कलिंग के महाराज रत्नदेव ने सन 1050 में रतनपुर में ही किया था। यह जगह उनके राज्य के लिए राजनीतिक रूप से काफी महत्वपूर्ण थी। आज भी यहां उनके किलों के अवशेष देखे जा सकते हैं।
यहां माता अलसुबह से देर रात तक भक्तों को दर्शन देती हैं। ऐसा माना जाता है, नवरात्रि में यहां की गई पूजा कभी निष्फल नहीं जाती। यह मंदिर वास्तुकला के नागर घराने पर आधारित है। इसके चारों और 18 इंच मोटा परकोटा है। यह मंदिर 12 वीं शताब्दी के आसपास निर्मित माना जाता है। मंदिर के अंदर मां महामाया का मंदिर है। इसके अलावा महाकाली, भद्रकाली, सूर्यदेव, विष्णु और शिव के भी मंदिर हैं।
मंदिर में नवरात्रि के दौरान ज्योति कलश प्रज्जवलित किए जाते हैं। ये कलश अखंड होते हैं मतलब पूरे 9 दिनों तक ये लगातार जलते रहते हैं।
दर्शन का समय- देवी मां के दर्शनों का समय रोज सुबह 6 बजे से रात 8 बजे तक है। दोपहर 12 बजे माता को भोग लगाया जाता है। इस दौरान आधे घण्टे के लिए माता के दर्शन रोक दिए जाते हैं।नवरात्रि में मंदिर में काफी भीड़ होती है। उस समय मंदिर रात में 12 बजे तक खोला जाता है।
सामाजिक कार्य- सिद्ध शक्तिपीठ श्री महामाया मंदिर ट्रस्ट कई सामाजिक सेवाएं भी दे रहा है। नि:शुल्क अस्पताल, भोजशाला, वैदिक संस्कृत विद्यापीठ, सामूहिक विवाह कार्यक्रम आदि शामिल हैं।
कैसे पहुचें- बिलासपुर-अंबिकापुर राजमार्ग पर बिलासपुर से 25 किलोमीटर दूर ऐतिहासिक रतनपुर शहर है। बिलासपुर से निजी वाहन या सरकारी वाहन द्वारा पहुंचा जा सकता है।











