Home» Jeevan Mantra »Fitness Mantra »Healthy Life » पेट की समस्याओं के अचूक सामाधान: सवाल आपके जवाब हमारे

पेट की समस्याओं के अचूक सामाधान: सवाल आपके जवाब हमारे

डॉ .नवीन जोशी एम.डी.� | Oct 17, 2011, 13:11PM IST
पेट की समस्याओं के अचूक सामाधान: सवाल आपके जवाब हमारे

पेट से सम्बंधित बीमारियों के लिए आपके प्रश्नों के समाधान और इस परिशिस्ट को प्रारंभ करने के लिए मैं दैनिक भास्कर के जीवन मन्त्र  टीम को बधाई देता हूँ।

आयुर्वेद के अनुसार उदर यानि पेट में होनेवाले रोग सभी रोगों के कारण हैं और पाठकों के अधिकांश प्रश्न पेटदर्द ,कब्ज ,अधिक डकारें आना ,हायपरएसिडीटी,पेट में गैस बनना,आँतों  की समस्या,डायरिया ,सामान्य कमजोरी,कोलाईटीस,बदहजमी ,पेट साफ़ नहीं होना,बार-बार मल त्यागने की इच्छा होना,एन्जाएटी आदि से सम्बंधित प्राप्त हुए हैं ,मेरा प्रयास है ,कि़  पाठकों की अधिकाँश पेट से सम्बंधित समस्या का यथासंभव विंदुवार ढंग से  निराकरण हो  पाए।

-सामान्य पेट दर्द के लिए आप शंख वटी-2-2 गोली सुबह शाम गुनगुने पानी से लें तथा यथासंभव हल्का मसाले रहित  भोजन का सेवन करें,यदि पेट का दर्द असहनीय हो तो शीघ्र किसी अनुभवी चिकित्सक के परामर्श से अल्ट्रासाउंड करायें।

-अधिक डकारें आना भोजन के असम्यक पाचन के कारण उत्पन्न हो सकता है,ऐसी स्थिति में आप सिर्फ आयुर्वेदिक औषधि हिंग्वाष्टक चूर्ण को अविपत्तिकर चूर्ण के साथ मिलाकर आधे से एक चम्मच की मात्रा में गुनगुने पानी से सेवन करें ,निश्चित लाभ मिलेगा,इसके अलावा पंचासव को 10-15 मिली की मात्रा में समभाग जल से लें।

-कब्ज की समस्या जिसे पाठकों ने पेट साफ होना बतलाया है,इसका प्रमुख कारण अनियमित दिनचर्या एवं खानपान है,ऐसा देखा गया है ,कि लोग पेट साफ करने के लिए किसी न किसी परगेटिव या लेक्जेटिव का प्रयोग स्वयं करते रहते हैं ,मेरा आप से अनुरोध है, कि स्वयं इनके प्रयोग से यथासंभव बचें,इनसे धीरे-धीरे आपको इनके सेवन की आदत पड़ जाती है और बाद में इन्हें लेने के बाद भी मल खुल कर नहीं आता है ,यही कालांतर में पाईल्स जैसी समस्या का कारण बनता है। आप एक से दो हरड रोज प्रात: गुनगुने पानी से चबाएं,इसके अलावा अत्यधिक कब्ज होने पर एरंड तेल (केस्टर आयल ) को  10 मिली की मात्रा में रात को सोने से पूर्व सुखोष्ण दूध से लें, आपको कब्ज से राहत मिलेगी,आप पंचसकार चूर्ण -5 से 10 ग्राम (आयु के अनुसार) तथा अभयारिष्ट-10 -15 मिली की मात्रा में समभाग जल से भोजनोपरांत लें, यह आपके लिए निश्चित ही फायदेमंद होगा।

- कई पाठकों ने गैस बनने की समस्या बतायी ०है ,इसका कारण भी पाचन का सम्यक न होना है ,आप सिर्फ हिन्ग्वादीवटी या कांकायनवटी को 2-2 गोली की मात्रा में गुनगुने जल से सेवन करें ,आपको इस समस्या से निजात मिल जायेगी,लेकिन भोजन एवं दिनचर्या के नियमों का पालन आवश्यक होगा जो जीवन मंत्र में समय समय पर आपको बताये जा रहे हैं।

-बार-बार मल त्यागने की इच्छा के पीछे एक बीमारी होती है ,जिसे ईरेटेबलबाउलसिंड्रोम कहते हैं,अधिकांश लोग इस बीमारी से परेशान होकर लगातार चिकित्सक एवं दवा बदलते रहते हैं ,मेरा उन रोगियों से अनुरोध है ,कि आप आधुनिक दवाओं के सेवन के स्थान पर आयुर्वेदिक उपचार जैसे :बिल्व चूर्ण -1.5ग्राम ,कुटज चूर्ण-1.5ग्राम ,विडंग चूर्ण -1.5ग्राम की मात्रा में गुनगुने पानी के साथ सेवन करें ,साथ ही ब्राह्मी वटी की दो-दो गोली साथ में सारस्वतारिष्ट की 10-15 मिली की मात्रा में समभाग जल से भोजन के उपरान्त सेवन करें आपको तनावमुक्त (एन्जायटी दूर कर ) अपने रोग को भुलाने का प्रयास  करना चाहिए।

-कुछ पाठकों ने एसिडीटी की  समस्या बतायी है, शायद वे इस समस्या से निपटने के लिए आधुनिक एंटएसिड लेते होंगे,हम आपको आयुर्वेदिक सरल उपाय बताते हैं, आप नित्य लौकी के रस का सेवन करें,व्रत एवं उपवास से बचें तथा थोड़ी-थोड़ी मात्रा में अंतराल पर हल्का भोजन करें,अधिक गर्म चाय,काफी एवं शराब  जैसे उत्तेजक पदार्थ इस समस्या को बढ़ा देते हैं,इनके सेवन से बचें,भोजन में सलाद की मात्रा बढायें,एवं ठंडा दूध,ककड़ी ,खीरा,तरबूज आदि का सेवन करें,अत्यधिक एसिडीटी होने पर अविपत्तिकर चूर्ण -2.5ग्राम से 5 ग्राम की मात्रा,सूतशेखर रस -2-2गोली पानी से लें निश्चित लाभ मिलेगा,यदि लम्बे समय से एसिडीटी की समस्या हो तथा उल्टी के साथ खून आ रहा हो तो शीघ्र चिकित्सक से परामर्श लें शायद आपको एंडोस्कोपी कराने की आवश्यकता हो।

-डायरिया के रोगी सबसे पहले अपने शरीर से निकले जल की पूर्ति हेतु नमक,चीनी एवं पानी के घोल का तत्काल सेवन करें,प्रारभिक अवस्था में कपूर रस की  250  मिलीग्राम से 500 मिलीग्राम की  गोली एवं गंगाधर चूर्ण 2.5 ग्राम से 5 ग्राम की मात्रा में मल को बाँधने के लिए अच्छी आयुर्वेदिक औषधि है ,परन्तु यदि अधिक जल के क्षय होने की दशा में इंट्रावेनस ईन्फ्युजन देना आवश्यक हो जाता है, अत: ऐसे रोगी आधुनिक उपचार हेतु अस्पताल का रुख करें ढ्ढ

-कुछ पाठकों ने कोलाईटीस  की समस्या बतायी है, यह भी पेट के रोगीयों में एक सामान्य समस्या है, रोगी म्यूकस (आंव ) के निकलने से परेशान होता है ,तथा इस कारण भी पेट में दर्द बना रहता है ,आप केवन ताजे मे यानि छांछ का सेवन करें,पंचामृतपर्पटी-250मिलीग्राम  से 500 मिलीग्राम की मात्रा में,कुटजारिस्ट-10-20 मिली की मात्रा में समभाग जल से लेना रोगियों में चमत्कारिक प्रभाव दर्शाता है इसके अलावा  बिल्व का पानक या अवलेह भी रोगियों में फायदेमंद  होता है।

-एक पाठक  ने कब्ज के कारण पेट में कीड़े पड़ जाने की बात कही है ,पर कीड़े कब्ज के कारण नहीं पड़ते, बल्कि इसके पीछे भोज्य पदार्थों के साथ प्रदूषित जल का सेवन एक कारण है,आपको विडंगारिष्ट की 10-20 मिली  की मात्रा समभाग जल से भोजन के उपरांत लेनी चाहिए,साथ मैं कृमीमुद्गर रस की दो -दो गोली गुनगुने पानी से लगभग  पंद्रह दिनों तक सेवन करना चाहिए,इसी के साथ दुबला होने की समस्या भी जुड़ जाती है ,यदि आप के भोजन का पाचन,अवशोषण एवं बहिर्गमन अच्छी तरह होगा तो आपकी सेहत तो खुद ब खुद ठीक हो जायेगी ,अत: पेट के रोगियों को अपने खान पान के साथ-साथ, पथ्य-अपथ्य (खाए न खाए जाने योग्य ) भोज्य पदार्थों के सेवन के नियमों का अवश्य पालन करना चाहिए।

-एक पाठक ने बाईं  और पेट में दर्द के साथ साथ पीला पेशाब आने की समस्या बतायी है ,ऐसा संभवत: लीवर की समस्या के कारण हो सकता है, लीवर को नुकसान   पहुंचाने वाले तत्वों जैसे: शराब ,दर्द निवारक दवाओं ,बुखार की दवा -पारासेटामोल आदि का सेवन फ़ौरन बंद कर दें ,अपने लीवर के एन्जायम्स  की जांच करायें,आपके लिए आरोग्यवर्धिनी वटी- 2-2 गोली सुबह शाम ,भूमीआंवलकी चूर्ण-1.5 ग्राम ,पुनर्नवा चूर्ण -1.5 ग्राम ,गिलोय चूर्ण -1.5 ग्राम का सेवन फायदेमंद रहेगा, लेकिन यदि सीरम में बीलुरीबिन की मात्रा 4 ग्राम प्रति  डी.एल. से अधिक हो ,तो फ़ौरन चिकित्सक के पास जाकर अपने लीवर के फंक्शन  की जांच करायें।

-बच्चों में सुबह-सुबह पेट दर्द का कारण कीड़े (राउंड वर्म/पिन वर्म ) हो सकते हैं,ऐसी स्थिति में बच्चे को भूख नहीं लगती और उसके चेहरे पर सफ़ेद धब्बे पड़े साफ़ दिखते  हैं,बच्चों को छह महीने में एक बार डी-वर्मिंग (कृमि- नाशक ) दवा अवश्य दें ,इनके लिए कृमिकुठार रस 250 मिलीग्राम की मात्रा में विडंग-अवलेह एक चम्मच  के साथ सुबह-शाम  देना फायदेमंद होगा ढ्ढ

-स्त्रियों में माहवारी के समय होनेवाला पेट दर्द एक सामान्य दर्द है ,हाँ यदि खून अधिक आता है ,तो यह एक अलग समस्या है, आप अशोकारिष्ट की 10-15 मिली की मात्रा भोजन उपरांत सुबह शाम समभाग जल से लें ,प्रदरान्तक लौह एवं धात्री लौह की 500 मिलीग्राम से 1 ग्राम की मात्रा आपके लिए हितकारी होगी।

-पेट में  नाभि के हिस्से के फूल जाने का सम्बन्ध जलोदर रोग से भी  होता है, पर आम तौर पर होनेवाली परेशानी जिसे 'नाल खिसकनाÓ कहते हैं. केवल गर्म पानी की सिकाई से ही ठीक  हो जाता है ,यदि दवा लेनी ही हो तो आप लशुनादी वटी का सेवन -1-2 गोली की मात्रा में करें।

-ऐसे ही पाठकों ने कब्ज के कारण पीठ में दर्द ,माहवारी के समय दर्द ,खाने से पूर्व दर्द आदि अनेक सामान्य समस्याएं बतायी है ,जिनका  निराकरण मैंने उनके मूल कारणों  की यथासंभव  चिकित्सा द्वारा बताने का प्रयास किया है ,फिर भी यदि ये समस्याएं इन सामान्य आयुर्वेदिक उपचारों से ठीक होती नजर न आ रही हों तो बेहतर है, कि आप चिकित्सकीय परीक्षण  के लिए कुशल चिकित्सक  से संपर्क  करें ढ्ढ अंत में मेरी सभी दैनिक  भास्कर जीवन मंत्र के पाठकों को सलाह है, कि़  हमारे शरीर  में प्राकृतिक रूप से रोगों से लडऩे की क्षमता होती है,आवश्यकता सिर्फ इस बात की है ,कि इस क्षमता को हम कैसे योग,आसन,प्राणायाम,प्राकृतिक, आयुर्वेदिक उपचार आदि द्वारा बरकार रख पाते हैं ,जिससे सभी रोगों के मूल में स्थित कारण पेट के रोगों का उपचार ही नहीं बल्कि  भविष्य में इनके  होने की संभावना को भी कम कर स्वास्थ्य का संरक्षण किया जा सकता है ।


Ganesh Chaturthi Photo Contest
आपके विचार
 
अपने विचार पोस्ट करने के लिए लॉग इन करें

लॉग इन करे:
या
अपने बारे में बताएं
 
 

दिखाया जायेगा

 
 

दिखाया जायेगा

 
कोड:
5 + 1

 
विज्ञापन

बड़ी खबरें

Ganesh Chaturthi Photo Contest

रोचक खबरें

विज्ञापन

बॉलीवुड

स्पोर्ट्स

जोक्स

पसंदीदा खबरें

फोटो फीचर

 
Email Print Comment