शनि की साढ़ेसाती और ढय्या या अन्य कोई शनि दोष हो तो हर शनिवार को किसी भी पीपल के वृक्ष को दोनों से स्पर्श करें। स्पर्श करने के साथ ही पीपल की सात परिक्रमाएं करें। परिक्रमा करते समय शनिदेव का ध्यान करना चाहिए। किसी शनि मंत्र (ऊँ शंशनैश्चराय नम:) का जप करें या ऊँ नम: शिवाय का जप करें। इस प्रकार हर शनि को करें।