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इन लोगों को नहीं मिलता है भूमि और भवन का सुख

धर्म डेस्क. उज्जैन | Feb 16, 2013, 11:33AM IST
इन लोगों को नहीं मिलता है भूमि और भवन का सुख

यदि किसी व्यक्ति की कुंडली वृश्चिक लन की हो और उसके नवम या दशम भाव में शनि स्थित हो तो व्यक्ति के जीवन पर क्या-क्या प्रभाव पड़ते हैं...
वृश्चिक लग्न की कुंडली के नवम भाव में शनि हो तो...
जन्म कुंडली का नवम भाव भाग्य एवं धर्म का कारक स्थान होता है। वृश्चिक लग्न की कुंडली के इस स्थान कर्क राशि का स्वामी चंद्र होता है। चंद्र की इस राशि में शनि होने पर व्यक्ति को असंतोष का सामना करना पड़ता है। कार्यों में अक्सर बाधाएं आती हैं। कड़ी मेहनत के बाद भी दैनिक जीवन के आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए संघर्ष करना होता है। शत्रु-पक्ष से कुछ परेशानी उठानी पड़ सकती है।
वृश्चिक लग्न की कुंडली के दशम भाव में शनि हो तो...
जिन लोगों की कुंडली के नवम भाव में शनि स्थित हो तो उन्हें पिता की ओर से पूर्ण सहयोग प्राप्त नहीं हो पाता है। जन्मकुंडली का दशम भाव पिता एवं शासकीय कार्यों से संबंधित होता है। वृश्चिक लग्न में इस स्थान सिंह राशि का स्वामी सूर्य है। सूर्य की इस राशि में शनि होने पर व्यक्ति को कई प्रकार की परेशानियों का सामना करना पड़ता है। इन लोगों को भूमि एवं भवन का सुख भी पूर्ण रूप से प्राप्त नहीं हो पाता है।

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