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शनि के कारण ऐसे लोग होते हैं भाग्यशाली

धर्म डेस्क. उज्जैन | Feb 14, 2013, 13:56PM IST
शनि के कारण ऐसे लोग होते हैं भाग्यशाली

यदि किसी व्यक्ति की कुंडली वृश्चिक लग्न की हो और उसके प्रथम या द्वितीय भाव में शनि स्थित हो तो व्यक्ति के जीवन पर क्या-क्या प्रभाव पड़ते हैं...
वृश्चिक लग्न की कुंडली के प्रथम भाव में शनि हो तो...
कुंडली का प्रथम भाव शरीर का कारक स्थान होता है। यहां शनि होने पर व्यक्ति स्वभाव से उग्र हो सकता है। वृश्चिक लग्न में प्रथम भाव वृश्चिक राशि का स्वामी मंगल है। मंगल की इस राशि में शनि होने पर व्यक्ति माता की ओर से पूर्ण सहयोग और स्नेह प्राप्त करता है। घर-परिवार में भी ये लोग मान-सम्मान और प्रतिष्ठा प्राप्त करते हैं। ये पराक्रमी होते हैं और अपने साहस से ही सभी कार्यों में सफलता प्राप्त कर लेते हैं। पिता की ओर से कुछ समस्याएं बनी रहती हैं। यदि ये लोग व्यवसाय करते हैं तो इन्हें सावधानी रखना चाहिए।
वृश्चिक लग्न की कुंडली के द्वितीय भाव में शनि हो तो...
भृगु संहिता के अनुसार कुंडली का दूसरा भाव धन एवं कुटुंब का कारक भाव होता है। वृश्चिक लग्न में इस स्थान धनु राशि का स्वामी गुरु है। गुरु की इस राशि में शनि होने पर व्यक्ति घर-परिवार से पूर्ण सुख प्राप्त नहीं कर पाता है। इन्हें स्वास्थ्य के संबंध में अवश्य संतुष्टि रहती है। धन से जुड़े कार्यों में इन्हें विशेष सफलता प्राप्त होती है। आमतौर पर ये लोग भाग्यशाली कहे जा सकते हैं।

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