Home» Jeevan Mantra »Jyotish »Jyotish Nidaan » Jyts Effects Of Ketu In Tula Lagna's Kundli 5-6 Houses

ऐसे लोगों को शिक्षा प्राप्त करने में आती हैं परेशानियां

धर्म डेस्क. उज्जैन | Jan 07, 2013, 15:24PM IST
ऐसे लोगों को शिक्षा प्राप्त करने में आती हैं परेशानियां

जानिए यदि किसी व्यक्ति की कुंडली तुला लग्न की हो और उसके पंचम या षष्ठम भाव में केतु स्थित हो तो व्यक्ति के जीवन पर क्या-क्या प्रभाव पड़ते हैं-
तुला लग्न की कुंडली के पंचम भाव में केतु हो तो...
जिन लोगों की कुंडली तुला लग्न की है और उसके पंचम भाव में केतु स्थित है तो उन लोगों को संतान के संबंध में कुछ परेशानियों का सामना करना पड़ता है। कुंडली का पांचवां भाव शिक्षा एवं संतान का कारक स्थान होता है। तुला लग्न की कुंडली में इस स्थान मकर राशि का स्वामी शनि है। शनि की इस राशि में केतु होने पर व्यक्ति को शिक्षा प्राप्त करने में भी कुछ समस्याएं बनी रहती हैं।
तुला लग्न की कुंडली के षष्ठम भाव में केतु हो तो...
कुंडली का षष्ठम भाव रोग एवं शत्रु का कारक स्थान होता है और तुला लग्न में इस स्थान मीन राशि का स्वामी गुरु है। गुरु की इस राशि में केतु होने पर व्यक्ति को शत्रुओं से हमेशा परेशानियों का सामना करना पड़ता है। कुंडली के षष्ठम भाव में केतु स्वास्थ्य संबंधी खतरा भी पैदा करता है। इनके जीवन में लड़ाई-झगड़े और बीमारियां भी बनी रहती हैं। ऐसी ग्रह स्थिति के कारण व्यक्ति को नानिहाल पक्ष से भी पूर्ण सुख प्राप्त नहीं हो पाता है।

BalGopal Photo Contest
आपके विचार
 
अपने विचार पोस्ट करने के लिए लॉग इन करें

लॉग इन करे:
या
अपने बारे में बताएं
 
 

दिखाया जायेगा

 
 

दिखाया जायेगा

 
कोड:
2 + 5

 
विज्ञापन

बड़ी खबरें

BalGopal Photo Contest

रोचक खबरें

विज्ञापन

बॉलीवुड

स्पोर्ट्स

जोक्स

पसंदीदा खबरें

फोटो फीचर

 
Email Print Comment