आज सुखी कोई नहीं है। हर किसी को कुछ ना कुछ दुःख या अशांति जरुर है। सुख और शांति दोनों मन के भीतर के भाव हैं। बाहरी पदार्थों में ढूंढ़ने से नहीं मिलेंगे। इसके लिए हमें मन के भीतर की यात्रा करनी होगी।
जब तक हम बाहरी दुनिया में रमे हुए हैं, तब तक भीतरी शांति नहीं पा सकते। कई बार प्रयासों के बाद भी सफलता नहीं मिलना, बहुत सफल होने पर भी अशांति का एहसास होना, बहुत संसाधनों को भोगने के बाद भी सुख का अनुभव नहीं होना ये सब भीतरी अशांति और असंतोष के परिणाम हैं।
महान संत कबीर दास ने जीवन में अशांति के ऐसे ही कारणों पर रोशनी डाली है। कबीर का दार्शनिक भाव अनूठा और सटीक है। आइए कबीर से सीखें भीतरी शांति और संतुष्टि पाने के कुछ उपाय।