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रावण के अनुसार हर स्त्री में होती हैं ये 8 बुराईयां

धर्मडेस्क. उज्जैन | Jan 24, 2013, 16:18PM IST
रावण के अनुसार हर स्त्री में होती हैं ये 8 बुराईयां
रामचरितमानस में मिले एक प्रसंग के अनुसार वानरराज सुग्रीव ने अपना सिर रामजी की गोद में रखा हुआ है। उनकी बांयी और धनुष तथा बांयी और तरकस है।  विभीषण बोले लंका की चोटी पर एक महल है। रावण वहां नाच-गाना देख रहा है। सुनिए ताल और मृदंग बज रहे हैं। तब रामजी ने इसे रावण का अभिमान समझा और मुस्कुराकर धनुष चढ़ाया। एक ही बाण से रावण के मुकुट और मंदोदरी के कर्ण फूल गिरा दिए। लेकिन इसका भेद किसी ने न जाना ।
ऐसा चमत्कार करके श्रीरामजी का बाण आकर तरकस में वापस आ घुसा। रंग में भंग देखकर रावण की सारी सभा भयभीत हो गई। न भूकम्प हुआ, न बहुत जोर की हवा चली। न कोई अस्त्र-शस्त्र ही नेत्रों से देखे। सभी अपने-अपने मन में सोच रहे हैं कि यह तो बहुत बड़ा अपशकुन हो गया। पूरी सभा को डरा हुआ देखकर रावण ने हंसकर ये वचन कहे- मुकुट का गिरना भी जिसके लिए निरंतर शुभ होता रहा है, तो कर्णफूल का गिरना अपशकुन कैसा? अपने-अपने घर जाकर सो जाओ (डरने की कोई बात नहीं है)। जब से कर्णफूल पृथ्वी पर गिरा, तब से मंदोदरी के दिल में डर बैठ गया। मंदोदरी ने रावण को बहुत समझाया। पत्नी के वचन सुनकर रावण खूब हंसा और बोला - ओह अज्ञान की महिमा बहुत बलवान है।
स्त्री के स्वभाव के बारे में सब सत्य ही कहते हैं कि उसके हृदय में आठ अवगुण सदा रहते हैं। साहस, झूठ, चंचलता, माया, डर, अविवेक, अपवित्रता और निर्दयता। तूने शत्रु का समग्र विराट रूप गाया और मुझे उससे डराने की कोशिश की। तेरी कृपा से मुझे यह अब समझ आया कि तू इस प्रकार मेरी ही प्रभुता का बखान कर रही है। यह सुनने के बाद मंदोदरी  ने मन ही मन सोचा कि उसके पति की काल के वश मति भ्रष्ट हो गई है।
 

 

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