- भगवान ने तो मनुष्य को अपने समान ही बनाया, लेकिन दुर्भाग्य से इंसान ने भगवान को अपने जैसा बना डाला। मनुष्य तो दुर्बलताओं की प्रतिमा है।
- मौन वार्तालाप की एक महान कला है। इसमें शब्दों की अपेक्षा वाकशक्ति अधिक होती है। फरिश्तों की कानाफूसी सुनने के लिए थोड़ा मौन रहें।