- राजनीति की चालों से सफलता पाकर कोई अपने को चतुर समझ सकता है। मगर, प्रेम करने वाले हृदय को खो देना सबसे बड़ी हानि है।
- विद्या का अंतिम लक्ष्य चरित्र-निर्माण होना चाहिए। जैसे सूर्य सबको एक सा प्रकाश देता है। उसी तरह से विद्यावृष्टि सब पर बराबर होनी चाहिए।