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हार्मोन थेरेपी से हो सकता है इस बड़ी परेशानी का हल

धर्मडेस्क. उज्जैन | Feb 16, 2013, 12:44PM IST
हार्मोन थेरेपी से हो सकता है इस बड़ी परेशानी का हल


हार्मोन थेरेपी को लेकर भ्रम की स्थिति बनी हुई है। यह इतनी पेचीदा है कि पिछले में इसके लिए तमाम भ्रामक और विरोधाभासी दिशानिर्देश जारी किए गए। हाल में फिर से कई आधिकारिक संगठनों ने हार्मोन थेरेपी के लिए नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। 1960 से 2002 तक, मेनोपॉज के लक्षणों और महिलाओं के लिए जानलेवा दिल की बीमारियों का पता लगाने के लिए ज्यादातर डॉक्टर हार्मोन थेरेपी की सलाह देते थे।
2002 में इसके विरोध का सिलसिला शुरू हुआ। फिर नए-नए खुलासे हुए। वीमेंस हेल्थ इनीशिएटिव नाम की स्टडी में बताया गया कि हार्मोन थेरेपी से हार्ट अटैक,स्ट्रोक, डिमेंशिया, ब्रेस्ट कैंसर के साथ-साथ फेफड़ों व पैरों में खून जमने का खतरा बढ़ता है। नतीजतन, कई डॉक्टरों ने हार्मोनथेरेपी से किनारा कर लिया।
हार्वर्ड मेडिकल स्कूल में गायनोकोलॉजी की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. मार्था रिचड्र्सन कहती हैं, 'हमने नहीं सोचा था कि वीमेंस हेल्थ इनीशिएटिव के नतीजे इस तरह के होंगे, और कुछ हद तक हमने ज्यादा ओवररिएक्ट भी किया। हालांकि, पिछले दशक में हुए कुछ शोधों से कुछ ऐसे तथ्य सामने आए हैं जो कई नईबातों की ओर इशारा कर रहे हैं। इसमें कोई शक नहीं कि हार्मोन थेरेपी के जरिए महिलाओं को मेनोपॉज के कष्टकारी लक्षणों से निजात मिल जाती है। लेकिन, सवाल यह है कि क्या डॉक्टर सही सोच रहे थे कि दिल की बीमारियों की रोकथाम में भी हार्मोन थेरेपी बहुत कारगर है। वीमेंस हेल्थ इनीशिएटिव की स्टडी में जिन महिलाओं ने हिस्सा लिया था, उनकी उम्र 63 साल थी।
इस उम्र की महिलाओं में हार्मोन थेरेपी से हार्ट अटैक और स्ट्रोक का खतरा लाजिमी है। हालांकि, हाल में हुए शोध इशारा करते हैं कि हार्मोन थेरेपी 60 साल से कम उम्र की महिलाओं के लिए काफी कारगर साबित हो सकती है। मसलन, अक्टूबर 2012 में बीएमजे नामक जर्नल में प्रकाशित हुई एक डैनिश स्टडी में बताया गया कि जो महिलाएं मेनोपॉज के 10 साल बाद तक हार्मोन थेरेपी करवाती हैं, उनमें हार्ट अटैक या स्ट्रोक से मरने का खतरा काफी कम होता है। इतना ही नहीं, इससे कैंसर का खतरा भी काफी हद तक कम हो जाता है।
खासियत आम तौर पर यह एस्ट्रोजेन और प्रोजेस्टेरोजेन का मिश्रण होता है। अगर ऑपरेशन के बाद आपका यूट्रस निकाला जा चुका है, तो आपको प्रोजेस्टेरोजेन की जरूरत नहीं पड़ेगी। इससे कई तरह के मेनोपॉज के लक्षण से निजात मिल जाती है। मसलन, रात में पसीना आना, योनि में जलन,त्वचा का सूखना और मूड में जल्दी-जल्दी बदलाव। हार्मोन थेरेपी टैबलेट, क्रीम, जेल और स्किन पैच जैसे कई रूप में ली जा सकती है।
 

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