-जिन स्त्रियों में गर्भ नहीं ठहरता हो, उन्हें मौलसिरी की छाल के चूर्ण को पांच से दस ग्राम की मात्रा में लेकर काढ़ा बनाकर दस से पंद्रह मिली खाली पेट सेवन करने से गर्भाशय की शुद्धि होती है और स्त्री गर्भधारण योग्य हो जाती हैं। बकुल की छाल को पांच से दस ग्राम की मात्रा में बराबर मात्रा में शक्कर मिलाकर स्त्री को खिलाने से गर्भाशय से निकलने वाला स्राव बंद हो जाता है।यदि महिलाओं में योनिस्राव जैसी स्थिति हो तो इसकी छाल के चूर्ण को दो से पांच ग्राम की मात्रा में शहद के साथ दिन में दो से तीन बार चिकित्सक के परामर्श से सेवन करने से योनिस्राव ठीक जाता है।