
टाइम पर खाना नहीं खा पातें तो जरा ये पढ़िए
धर्मडेस्क. उज्जैन
| Nov 19, 2012, 13:23PM IST

भूख लगना एक प्राकृतिक क्रिया है। भूख की शक्ति इतनी इतनी तेज होती है कि उसे बर्दाश्त करना जरा मुश्किल होता है। लेकिन आजकल का वर्किंग कल्चर ही ऐसा है कि सामान्यत: लोग सुबह थोड़ा बहुत खाकर ऑफिस या अपने कार्यस्थल पर चले जाते है।
दोपहर में भोजन करते हैं। लेकिन अधिकतर लोगों के लंच टाइम का कोई ठिकाना नहीं होता है। भूख लगने पर भी भोजन न करने से शरीर में शिथिलता व कमजोरी का अनुभव होने लगता है क्योंकि हमारे शरीर में जठाराग्रि आहार को पचाने काम करती है। आहार न मिलने पर वही अग्रि वात पित्त व कफ को पचाती है। शरीर की धातुओं का क्षय होने लगता है।
इसीलिए भूखा रहने पर शरीर सुखने लगता है। भूख लगने पर भोजन न करने पर या भूख मारने से भोजन के प्रति अरूचि, थकावट,आंखों की ज्योति कम होना, कमजोरी आदि समस्याएं होती हैं। भूख मरने पर खाया हुआ खाना हजम नहीं होता और जितना कुछ हजम होता है वह भी बहुत देर से होता है। इसलिए भूख मारना ठीक नहीं होता।










