भक्ति में अविश्वास का कोई स्थान नहीं होता। धर्मशास्त्र भी यही कहते हैं कि आस्था, विश्वास, प्रेम और भावना ही ऐसी वजह है जो ईश्वर को भी भक्त के पास आने को मजबूर करती है। भगवान शिव भी ऐसे ही देवता माने जाते हैं, जो भक्तो की थोड़ी ही उपासना से प्रसन्न हो जाते हैं।
शिव की प्रसन्नता के ही इन उपायों में महामृत्युञ्जय मंत्र को बहुत ही अचूक माना जाता है। शिवपुराण में तो शिव भक्ति के काल जैसे प्रदोष, सोमवार, चतुर्दशी या हर रोज भी महादेव के इस मंत्र का अलग-अलग रूप और संख्या में जप तन, मन और धन का हर सुख देने वाला बताया गया है। इसके लिए यह भी जरूरी है कि भक्त बिना किसी कामना के शिव का ध्यान करे। पूरी पवित्रता व निष्काम यानी बिना स्वार्थ के नियत संख्या में मंत्र जप तो जन्म-जन्मान्तर के कर्मों का स्मरण कराने के साथ शिव के साक्षात दर्शन कराने वाला भी माना गया है।
अगली तस्वीर पर क्लिक कर जानिए, कितनी बार शिव के इस महामंत्र को बोलने या जप करने क्या-क्या होता है-