भगवान शिव महान योगी माने जाते हैं। उनका योग स्वरूप संसार के सुख और आनंद का कारण माना गया है। शास्त्रों के प्रसंग बताते हैं कि शिव की विष्णु और विष्णु की शिव भक्ति जगत कल्याण की वजह बनी। रुद्र अवतार श्रीहनुमान द्वारा विष्णु अवतार श्रीराम की सेवाभक्ति और श्रीराम द्वारा शिव भक्ति कर अधर्म के नाश के लिये लंका प्रस्थान से पहले शिवलिंग पूजा इसका प्रमाण भी है।
इसी कड़ी में सांसारिक जीवन में सफलता के सूत्रों से भरा गोस्वामी तुलसीदास द्वारा रचित महान धर्मग्रंथ रामचरितमानस में भी भगवान शंकर के अद्भुत स्वरूप का स्मरण मिलता है। यह शिव की प्रेरणा से ही रचित और प्रमाणित ग्रंथ माना गया है।
इस ग्रंथ के अयोध्याकाण्ड की शुरुआत में आया शिव के दिव्य स्वरूप का नियमित पाठ सभी परेशानियों व कष्टों का तुरंत नाश करने वाला माना गया है।
खासतौर सुबह शिव की आंकड़े के फूल, बिल्वपत्र, सफेद चंदन, अक्षत समर्पित कर इस श्लोक का स्मरण जीवन में चल रहे हर तनाव व परेशानी को शिव भक्ति से दूर करने का बेहद आसान व रामबाण उपाय भी माना गया है। अगली तस्वीर पर क्लिक कर जानिए यह श्लोक -