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PICS: रोज इस चमत्कारी श्लोक से शिव भक्ति है हर परेशानी का रामबाण उपाय

धर्म डेस्क. उज्जैन | Dec 01, 2012, 13:11PM IST
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भगवान शिव महान योगी माने जाते हैं। उनका योग स्वरूप संसार के सुख और आनंद का कारण माना गया है। शास्त्रों के प्रसंग बताते हैं कि शिव की विष्णु और विष्णु की शिव भक्ति जगत कल्याण की वजह  बनी। रुद्र अवतार श्रीहनुमान द्वारा विष्णु अवतार श्रीराम की सेवाभक्ति और श्रीराम द्वारा शिव भक्ति कर अधर्म के नाश के लिये लंका प्रस्थान से पहले शिवलिंग पूजा इसका प्रमाण भी है। 
इसी कड़ी में सांसारिक जीवन में सफलता के सूत्रों से भरा गोस्वामी तुलसीदास द्वारा रचित महान धर्मग्रंथ रामचरितमानस में भी भगवान शंकर के अद्भुत स्वरूप का स्मरण मिलता है। यह शिव की प्रेरणा से ही रचित और प्रमाणित ग्रंथ माना गया है। 
इस ग्रंथ के अयोध्याकाण्ड की शुरुआत में आया शिव के दिव्य स्वरूप का नियमित पाठ सभी परेशानियों व कष्टों का तुरंत नाश करने वाला माना गया है। 
खासतौर सुबह शिव की आंकड़े के फूल, बिल्वपत्र, सफेद चंदन, अक्षत समर्पित कर इस श्लोक का स्मरण जीवन में चल रह हर तनाव व परेशानी को शिव भक्ति से दूर करने का बेहद आसान व रामबाण उपाय भी माना गया है - 
यस्याङ्के च विभाति भूधरसुता देवपगा मस्तके 
भाले बालविधुर्गे च गरलं यस्योरसि व्यालराट्।
सोयं भूमिविभूषण: सुरवर: सर्वाधिप: सर्वदा।
शर्व: सर्वगत: शिव: शशिनिभ: श्रीशङ्कर पातु माम्।। 
इस श्लोक का सरल शब्दों में अर्थ है कि जिनकी गोद मे हिमालय की पुत्री पार्वती, मस्तक पर गंगाजी, ललाट पर दितीया यानी दूज का चांद, कण्ठ में भयंकर विष, वक्षस्थल पर नागराज शेष सुशोभित हैं। भस्म से रमे, देवताओं में भी श्रेष्ठ, भक्तों के पापों के संहारक, सर्वव्यापी यानी हर जगह मौजूद, कल्याणकारी, चन्द्रमा की तरह उजली आभा वाले भगवान शंकर मेरी रक्षा करे। 
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