शिव का एक नाम 'भगवान' भी है। शास्त्रों में भगवान का मतलब सर्वशक्तिमान व ऐश्वर्य, धर्म, यश, श्री, ज्ञान व वैराग्य सहित छ: गुणों से संपन्नता भी बताया गया है। शिव व उनके सभी अवतारों में ये गुण उजागर होते हैं व उनकी भक्ति भी सांसारिक जीवन में ऐसी शक्तियों की कामना पूरी करती है।
हिन्दू मान्यताओं के मुताबिक मार्गशीर्ष कृष्ण पक्ष की अष्टमी (6 दिसंबर) को शिव ने भैरव अवतार लिया, जिसका लक्ष्य दुर्गुणी व दुष्ट शक्तियों का अंत ही था, जो सुख, ऐश्वर्य व जीवन में बाधक होती है। शिव का यह कालरक्षक भीषण स्वरूप कालभैरव व काशी के कोतवाल के रूप में पूजनीय है।
यही वजह है कि इस दिन कालभैरव के साथ शिव के कई भैरव स्वरूपों की पूजा काल, धन, यश की कामना को पूरी करने वाली मानी गई है। किंतु कामनासिद्धि या धन लाभ की नजरिए से शास्त्रों में भैरव पूजा के सही वक्त व तरीके बताए गए हैं। अगली तस्वीर पर क्लिक कर जानिए -