जगतजननी दुर्गा को परमेश्वरी यानी ईश्वर का शक्ति स्वरूप माना जाता है। इस शक्ति का वजूद सृष्टि के हर अंश में माना गया है। इसलिए सच्चे, साफ मन व मकसद के साथ किसी भी तरह से शक्ति संपन्न बनने की इच्छा, काम या सोच शक्ति उपासना के समान ही मानी गई है। देवी उपासना तन, मन व धन से ही जुड़े सारे दु:खों का अंत करने वाली मानी गई है। सांसारिक नजरिए से तन, मन और धन से संपन्नता ही अक्सर सबलता का पैमाना भी माना जाता है।
देवी उपासना से ऐसी कामनासिद्धि और संताप के नाश के लिए दुर्गासप्तशती के चमत्कारी श्लोक व मंत्रों का पाठ अचूक माना गया है। खासतौर पर देवी उपासना की घड़ी जैसे शुक्रवार, नवमी तिथि या नवरात्रि में काम या कामना विशेष पूरी करने के लिए अगली तस्वीर के साथ बताए जा रहे विशेष मंत्र का स्मरण मंगलकारी है-