धर्मशास्त्रों के मुताबिक राग-द्वेष की भावना से इंसान कई दु:ख, जाने-अनजाने शत्रुओं या दरिद्रता की वजह से नुकसान उठाकर दुर्गति का सामना करता है। जीवन को ऐसे ही भय, संशय, दु:ख व व्यक्ति या दुर्गुण रूपी शत्रु बाधा से बचने के लिये दुर्गतिनाशिनी दुर्गा की उपासना अचूक मानी गई है।
दुर्गा भक्ति के लिए नवदुर्गा स्वरूपों की तरह ही दशमहाविद्या भी भक्तों को तमाम सुखों को देने वाली शक्तियां मानी गई है। इन दशमहाविद्याओं में ही एक भगवती बगलामुखी की उपासना शत्रुबाधा और बुरी मंशाओं को असफल बनाने में असरदार व अचूक मानी गई है। शास्त्रों में देवी की इस शक्ति को 'स्तम्भन' पुकारा गया है। सरल शब्दों में कहें तो यह बुरे भाव या क्रियाओं को बेअसर करती या बांध देती है। यह भक्त के मन से भी क्लेश व दोष रूपी शत्रुओं का अंत करती है।
यही वजह है कि देवी उपासना के विशेष अवसरों, जिनमे आज बने शुक्रवार, गुप्त नवरात्रि व बसंत पंचमी के दुर्लभ योग में तो देवी बगलामुखी साधना बड़ी ही संकटमोचक मानी गई है। वैसे शास्त्रों में देवी बगलामुखी की साधना में नियम-संयम का महत्व बताया गया है। किंतु नियमित रूप से देवी स्मरण के लिए अगली तस्वीर के साथ बताई आसान विधि व मंत्र भी मंगलकारी और शत्रु बाधा दूर करने में असरदार साबित होगी -