जब किसी व्यक्ति, घर या परिवार की परेशानियों या संघर्ष का दौर खत्म न हो तो हर व्यक्ति उसकी वजह और उपाय जानकर छुटकारा चाहता है। हर काम में हो रही जद्दोजहद के कारणो को जानने की बात आती है तो हिन्दू धर्म शास्त्रों खासतौर पर भारतीय ज्योतिष शास्त्रों के मुताबिक कुण्डली में बने कुछ विशेष ग्रहयोगों का बुरा असर भी अड़चनों की वजह होता है। ऐसे ही ग्रह योगों में कुण्डली में बना कालसर्प योग या नागपाश योग भी शामिल है।
सरल शब्दों में समझें तो कालसर्प योग छायाग्रहों राहु और केतु के बीच सभी ग्रहों के आ जाने से बनता है। इस योग व प्रभावों से जुड़े ज्योतिष के जानकारों में भी मतभेद के बावजूद मोटे तौर पर कई मौकों पर यह पाया गया है कि जिस व्यक्ति की कुंडली में कालसर्प योग बनता है, उस व्यक्ति की जिंदगी उतार-चढ़ाव भरी और असाधारण होती है।
माना जाता है कि कालसर्प योग में अगर अन्य ग्रहों के बुरे असर या योग होने पर शनि पीड़ा के समान ही कष्ट देने वाला हो सकता है। इस कारण व्यक्ति कर्जदार, बेरोजगार, पारिवारिक और वैवाहिक जीवन में कलह से दु:ख पाता है। साथ ही संतान और सुखों से वंचित हो सकता है। इससे जीवन भर परेशानियों से जूझना भी पड़ सकता है।
कालसर्प दोष से होने वाली ऐसी समस्याओं से निजात पाने के लिए धर्म व ज्योतिष शास्त्रों में देव उपासना के उपाय बताए गए हैं। खासतौर पर कालसर्प योग शांति के लिए कालरूप नागों के स्वामी महाकाल यानी शिव की पूजा बहुत ही असरदार मानी गई है। यह पूजा भी अगर यहां बताई जा रही 2 खास जगहों व दिनों पर की जाए तो वह परेशानियों से छुटकारे के लिए बहुत ही अचूक मानी गई है। अगली तस्वीर पर क्लिक कर जानिए ये 2 स्थान और दिन -