सनातन धर्म की मान्यताओं में संसार पंचभूतों यानी पृथ्वी, जल, आकाश, वायु और अग्रि से बना है। ये पंच तत्व भी कहलाते हैं। हर तत्व का एक देवता स्वामी है, जो पंच देवों के रूप में पूजनीय है। भगवान शिव इन पांच तत्वों में से पृथ्वी तत्व के देवता माने जाते हैं। यही वजह है कि सांसारिक सुखों और कामनाओं की पूर्ति के लिए भगवान शिव की उपासना का खास महत्व है।
पौराणिक मान्यताओं में शिव का दिव्य ज्योर्तिलिंग अर्द्धरात्रि में ही प्रकट हुआ। इसलिए रात के समय शिव साधना बहुत ही असरदार मानी जाती है। इसी कड़ी में शिव भक्ति कि खास तिथियों जैसे अष्टमी, चतुर्दशी, प्रदोष व सोमवार या हर दिन भी रात में शिव साधना इच्छाएं पूरी करने और इष्टसिद्धि के लिए बहुत ही शुभ मानी गई है।
सोमवार (11 फरवरी) के साथ देवी पूजा का शुभ काल यानी गुप्त नवरात्रि की भी शुरुआत का दुर्लभ योग है। शिव व शक्ति की साथ-साथ भक्ति की अचूक घड़ियों में खासतौर पर यहां बताया जा रहा शिव मंत्र जप उपाय हर कामनासिद्धि के लिए बड़ा ही अचूक माना गया है।
अगर आपके भी इष्ट भगवान शिव हैं और सुख, शांति और सफलता की चाहत रखते हैं तो शिव भक्ति के इस विशेष काल में यहां बताए जा रहे शिव साधना के खास उपाय को अपनाएं। इसके शुभ प्रभाव को आप ज़िंदगी में दृश्य और अदृश्य रूप से सुख, शांति व सफलता के रूप में देखेंगे। अगली तस्वीरों के साथ जानिए यह अचूक मंत्र जप उपाय -