भगवान शिव की जगतपालक विष्णु भक्ति और भगवान विष्णु की शिव भक्ति के हिन्दू धर्मग्रंथों में कई प्रसंग उजागर हैं। मसलन, रुद्र अवतार श्रीहनुमान द्वारा विष्णु अवतार श्रीराम की सेवाभक्ति और श्रीराम द्वारा शिव भक्ति कर अधर्म के नाश के लिये लंका प्रस्थान से पहले शिवलिंग पूजा। असल में दोनों देवशक्तियों की एकरुपता का प्रमाण हैं।
इसी कड़ी में सांसारिक जीवन में सफलता के सूत्रों से भरा गोस्वामी तुलसीदास द्वारा रचित महान धर्मग्रंथ रामचरितमानस में भी भगवान शंकर के अद्भुत स्वरूप का स्मरण मिलता है। यह शिव की प्रेरणा से ही रचित और प्रमाणित ग्रंथ माना गया है।
इस ग्रंथ के अयोध्याकाण्ड की शुरुआत में आया शिव के दिव्य स्वरूप का नियमित या सोमवार को ध्यान सभी तनावों व परेशानियों को फौरन दूर करने वाला माना गया है।
खासतौर पर सोमवार की सुबह शिव की आंकड़े के फूल, बिल्वपत्र, सफेद चंदन, अक्षत समर्पित कर इस श्लोक का स्मरण करें यह शिव भक्ति का बेहद आसान उपाय भी है। अगली स्लाइड पर पहुंच जानिए यह शिव ध्यान श्लोक व इसके अर्थ में बताया शिव का अद्भुत स्वरूप -