देव पूजा परंपरा का एक अहम अंग है- दीपक लगाना। इससे जुड़ा धर्म सूत्र यही है कि दीपज्योति यानी प्रकाश, ज्ञान का प्रतीक है। जहां ज्ञान होता है, वहां सुख-समृद्धि ही नहीं होती, बल्कि कलह व तनाव भी दूर रहते हैं। इस ज्ञान के साथ ईश्वर कृपा और आशीर्वाद हो तो वह स्थान या व्यक्ति संकटमुक्त रहता है।
देव पूजा में दीपक लगाने के पीछे भी ईश्वर से ज्ञान, विद्या, सुख, समृद्धि की कामना ही होती है। धार्मिक मान्यताओं में दीप ज्योति में अग्रिदेव का वास भी माना गया है, जो पंचदेवों में एक सूर्य देवता का रूप भी माने गए हैं, जो प्राणशक्ति, सुख, सेहत और प्रतिष्ठा देने वाले परब्रह्म का ही रूप है।
बसंत पंचमी भी ज्ञान की देवी सरस्वती की वंदना की शुभ घड़ी है। ऐसे शुभ काल में धर्मशास्त्रों में देव उपासना के लिए बताया गया दीप जलाने का विशेष मंत्र बोल या पढ़ घी या तेल का दीप जलाकर माता सरस्वती की प्रतिमा या तस्वीर के सामने रखना भी ज़िंदगी के सारे तनावों व परेशानियों को दूर करने का आसान उपाय माना गया है। इसके साथ यथासंभव पूजा के अन्य विधान भी पूरे करें तो मंगलकारी होगा। अगली स्लाइड के साथ जानिए यह दीप मंत्र -