हिन्दू धर्मग्रंथों में हर युग में देव भक्ति व उपासना के विशेष तरीकों से भगवान को पाने की राह उजागर होती है। इनमें तप, यज्ञ, मंत्र जप व पूजा का खास महत्व बताया गया है। इसी कड़ी में कलियुग में तो केवल भगवान का नाम या कीर्तन ही इंसान को सारे सुख देने वाला माना गया है। लिखा भी गया है कि -
कलियुग तेरा नाम अधारा, सुमिर-सुमिर नर उतरहिं पारा।
सार है कि कलियुग में केवल मनुष्य भगवान के नाम सुमिरन से ही संसार सागर को पार कर सकता है।
देव नाम स्मरण इतना आसान भी होता है कि किसी भी काल, स्थान या स्थिति की बंदिश नहीं होती और फल भी पूरे मिलते हैं। इसी कड़ी में धर्म परंपराओं में भगवान राम के लिए गहरी आस्था और भक्ति से यह माना जाता है कि राम से भी बड़ा राम का नाम है। इसी महिमा से भगवान राम के नाम के स्मरण से ही कई इच्छाओं को पूरा करने के लिए शास्त्रों में ही राम नाम लिखकर स्मरण करने का भी अचूक तरीका बताया गया है। अगली तस्वीर पर क्लिक कर जानिए यह कामनाए पूरी करने वाला आसान व असरदार तरीका -
पौराणिक मान्यता है कि रामनाम लिखने का यह तरीका भगवान श्रीकृष्ण ने धर्मराज युधिष्ठिर को बताया था ताकि वह अपना छिना राज्य फिर से पाने की चाहत पूरी कर सकें। इसके मुताबिक श्रीकृष्ण ने बताया था कि -
- भगवान राम को चाहने वाला भक्त हर रोज भोजपत्र (आधुनिक संदर्भों में कागज भी इस्तेमाल कर सकते हैं) पर 900 या 108 बार रामनाम लिखे और उसकी पूजा करे।
- जब एक करोड़ या एक लाख नाम लिखकर पूरे हो जाएं तो 'इदं विष्णुः' मंत्र बोलते हुए घी, तिल व खीर से हवन कर श्रीराम की पूजा करे तो उसकी सारी इच्छाएं पूरी हो जाती है। खासतौर पर राम नाम लिखने की शुरुआत रामदूत हनुमान की भक्ति के दिन मंगलवार से करें तो बड़ी ही शुभ व मंगलकारी नतीजे मिलते हैं।
अगर हवन या एक करोड़ या एक लाख की संख्या में राम नाम लिखना संभव न भी हो तो ऊपर बताए पहले तरीके से मंगलवार को रामनाम लिखना भी कामनासिद्धि करने वाला उपाय माना गया है।