जीवन में तन, मन, धन, ज्ञान, व्यवहार, कर्म आदि बातों में अधूरापन दु:ख की जड़ है। शरीर में रोग विवशता, मन के दोष पाप और कलह, धन की कमी दरिद्रता, कर्म में कमी असफलता, व्यवहार में कमी असहयोग और ज्ञान में कमी तो उपेक्षा, अपमान, अपयश, यहां तक की घातक भी साबित होती है।
यही वजह है कि धर्म शास्त्र का ज्ञान व्यावहारिक जीवन में पूर्ण व दक्ष होने की अहमियत बताते हैं। यहां तक कि अधूरेपन में भी पूर्णता व सकरात्मकता को खोजने की दृष्टि सुख के लिए जरूरी मानी गई है।
इसी भाव से धर्म शास्त्रों में एक ही ईश्वर में अनेक और अनेक देवों में एक ही ईश्वर को देखने के भाव यानी पूर्ण व व्यापक स्वरूप के वंदन व स्मरण का महत्व बताया गया है।
जीवन के नजरिए से भी सफलता के लिए ही आज के भागदौड़ भरे युग में अनेक लोगों की जीवनशैली भी ईश्वर स्मरण के बिना अधूरी नजर आती है। खासतौर पर धर्म व ईश्वर में आस्थावान इंसान देव भक्ति की आस रखते हैं।
ऐसे ही लोगों के लिये यहां बताया जा एक मंत्र विशेष पाठ-पूजा से चूकने पर भी, कार्यालय या काम के दौरान फुर्सत के वक्त स्मरण या बोलने लेने भर से सारे देवताओं की पूजा का फल, लाभ व मानसिक शक्ति देने वाला माना गया है। अगली तस्वीर पर क्लिक कर जानिए, यह आसान मंत्र-