हिन्दू धर्मशास्त्रों व पुराणों के उपदेशों पर गौर करें तो मोटे तौर पर ज़िंदगी से जुड़ी एक अहम बात सीखने को मिलती है कि अगर सुख, शांति और सफलता की आस है तो हमेशा सकारात्मक सोच व संकल्प के साथ सच और न्याय का रास्ता ही चुनें।
ऐसी ही सीख लेकर अगर शनिदेव के स्वरूप व चरित्र का स्मरण व भक्ति की जाए तो जीवन में आने वाली हर तरह की मुश्किलों से बचना आसान हो सकता है। दरअसल, पौराणिक प्रसंगों या परंपराओं में शनि की क्रूरता या टेढ़ी चाल, शनि साढ़े साती या फिर शनि दशा जैसी शनि चरित्र से जुड़ी कई बातों पर नकारात्मक तरीके से विचार करने के बजाय इन बातों में छुपे शनिदेव के बेहद सकारात्मक पहलू को भी जाना व अपनाया जाए।
शास्त्रों में शनि चरित्र कर्मशील, ज्ञानी, तपस्वी, परोपकारी, कल्याणी, अन्याय के खिलाफ, सत्य और अनुशासन से भरा बताया गया है। इसलिए वह न्यायाधीश भी कहे गए हैं।
शनिवार को शनि के इसी न्याय व कर्म प्रधान स्वरूप का स्मरण अगली तस्वीर में बताए शनि मंत्र के साथ किया जाए तो कर्म, विचार व व्यवहार के सारे दोष व मुश्किलों का अंत होकर सुख-सौभाग्य प्राप्त होता है-