रुद्र अवतार श्रीहनुमान की वायु के समान तेज गति, तीक्ष्ण बुद्धि, वज्र के समान मजबूत व सभी इंद्रियों पर अद्भुत नियंत्रण के पीछे विलक्षण ज्ञान, संयम और योग बल शास्त्रों में उजागर है। इन शक्तियों के स्वामी होने से ही वह बलवीर, सिद्धवीर या बजरंगबली भी पुकारे जाते हैं।
यही वजह है कि श्रीहनुमान की उपासना भक्त को भी न केवल शरीर बल्कि मन और धन से संपन्न करने वाली भी मानी गई है। खासतौर पर हनुमान उपासना के तंत्र उपायों में बजरंग बाण का ध्यान तो सारे दु:ख, बाधा, कलह और अभाव का नाश करने वाला माना गया है।
खासतौर पर हिन्दू पंचांग के पौष मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि पर
श्रीहनुमान भक्ति का विशेष महत्व है। यह हनुमान अष्टमी भी कहलाती है। शास्त्रों के मुताबिक अष्टमी तिथि के स्वामी शिव है। वहीं रुद्र के ही ग्यारहवे अवतार माने जाते है श्रीहनुमान। मान्यता है कि एक बार इसी शुभ तिथि पर जब श्रीहनुमान ने घोर तप कर शिव भक्ति की, तो उनकी भक्ति से प्रसन्न शिव ने इस तिथि को श्रीहनुमान के नाम से ही प्रसिद्ध होने और इस दिन हनुमान उपासना संकटमोचक होने का वर दिया। इस तरह यह तिथि हनुमान अष्टमी के नाम से प्रसिद्ध हुई।
शनिवार और हनुमान अष्टमी (5 जनवरी) के दिन श्रीहनुमान उपासना से मनोकामना सिद्धि के लिए स्नान के बाद पवित्र वस्त्र व मनोभावों के साथ सिंदूर, लाल फूल, गुड़ से बनी मिठाई या गुड़-चने का भोग लगाएं। लाल आसन पर बैठ गुग्गल धूप व दीप लगाकर अगली तस्वीर में बताए बजरंग बाण का पाठ करें -