सूर्य हिन्दू धर्म के पंचदेवों में प्रमुख देवता है। सूर्य को प्रत्यक्ष देवता भी माना जाता है। पूरे जगत की प्राणशक्ति होने से वह जगतपिता भी कहलाते हैं। पौराणिक मान्यताओं में सूर्य को महर्षि कश्यप और अदिति का पुत्र माना गया है। उनकी माता के नाम से ही वह आदित्य भी कहलाते हैं।
शास्त्रों के मुताबिक सूर्यदेव के पुत्र शनि और यम व पुत्री यमुना भी प्रमुख पूजनीय देवी-देवता हैं। इसी तरह संकटमोचक देवता श्री हनुमान के गुरु भी सूर्यदेव ही हैं। यही कारण है कि सूर्य देव की उपासना शक्ति, सिद्धि, स्वास्थ्य, सम्मान, यश, ऐश्वर्य और खूबसूरती देने वाली मानी जाती है।
सूर्य उपासना की बहुत ही शुभ घड़ी मकर संक्रांति मानी जाती है। हिन्दू मान्यताओं के मुताबिक इस दिन से सूर्य उत्तरायन में प्रवेश करता है। सरल शब्दों में इस दिन से दिन बड़े होने लगते हैं।
ऐसी शुभ घड़ी में सूर्य के स्मरण के लिए ही शास्त्रों में 21 सूर्य नामों के स्मरण का बड़ी महत्व बताया गया है, धार्मिक मान्यता हैं कि स्वयं सूर्यदेव ने इन इक्कीस नामों को जगतकल्याण के लिए उजागर किया। यह इक्कीस नाम स्तवराज के नाम से भी जाने जाते हैं। इनका जप सूर्यदेव के हजार नामों के स्मरण के समान है।
धार्मिक नजरिए से सूर्य की प्रसन्नता और अनुकूलता के लिए इन इक्कीस नामों का सुबह और शाम स्मरण करने का महत्व बताया गया है। अगली तस्वीर पर क्लिक कर जानिए ये इक्कीस चमत्कारी सूर्य नाम -