हिन्दू पंचांग के हर माह की प्रदोष व चतुर्दशी तिथियों का स्वामी भगवान शिव को माना गया है। इन तिथियों पर शाम व रात को भगवान शिव की उपासना का विशेष महत्व है। क्योंकि पौराणिक मान्यताओं में भी दिव्य ज्योर्तिलिंग का प्राकट्य चतुर्दशी की रात को बताया गया है।
शास्त्रों में हर माह की चतुर्दशी व प्रदोष तिथियों पर व्रत और शिव पूजा के विधि-विधान सांसारिक जीवन से जुड़े तमाम सुख देने वाले माने गए हैं। इनमें रात को पूजा के बाद सोने के पहले विशेष शिव मंत्र प्रार्थना भी बताई गई है, जिससे शिव कृपा के साथ हर सुख मिलते हैं। 23 व 24 फरवरी को शनिवार व प्रदोष, शिव चतुर्दशी के लिए अगली स्लाइड पर पहुंच जानिए विशेष शिव पूजा विधि और शिव प्रार्थना -