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जानिए कौन सी हैं हनुमानजी की 4 करिश्माई शक्तियां

धर्म डेस्क, उज्जैन | Jan 02, 2013, 19:29PM IST
जानिए कौन सी हैं हनुमानजी की 4 करिश्माई शक्तियां

किसी भी लक्ष्य को भेदना शक्ति के बिना मुमकिन नहीं है। इंसानी जिंदगी से जुड़े भी कई मकसद होते हैं, जिनको पूरा करने के लिए किसी न किसी रूप में शक्ति का सही उपयोग जरूरी होता है। कई तरह की गुण और शक्तियों के बूते ही इंसान सफलता की ऊंचाईयों को छूता भी है। 
हिन्दू धर्म में शक्ति साधना के उपायों में ही शक्ति व पुरुषार्थ के साक्षात स्वरूप श्रीहनुमान का स्मरण अचूक माना जाता है। समुद्र लांघना, माता सीता की खोज, लंका दहन, रावण व मेघनाथ जैसे महावीरों से सामना और अद्भुत युद्ध कौशल में उजागर जुझारु और शूरता के साथ राम भक्ति व सेवा से भरा व्यक्तित्व व चरित्र ही उन्हें रामायण रूपी महामाला का रत्न बनाती है।
श्रीहनुमान चरित्र व नाम स्मरण बच्चों से लेकर बुजुर्गों को भी ऊर्जावान व जाग्रत बना देता है। किंतु खासतौर पर आज के दौर में ऊर्जा व जोश से भरे सफलता के आकांक्षी युवा अपनी शक्तियों को किसी तरह सकारात्मक दिशा में मोड़े, इस संबंध में श्रीहनुमान का चरित्र खासतौर पर चार शक्तियों को उजागर करता है।
आस्था है कि हनुमान भक्ति से हनुमान चरित्र की ये 4 शक्तियां बटोरने की प्रेरणा हर भक्त को मिलती हैं। खासतौर पर ये शक्तियां युवाओं को फौलाद सा मजबूत बनाने वाली साबित होती है-
देह बल - निरोगी, ऊर्जावान, तेजस्वी शरीर सफल जीवन की पहली जरूरत है। यह खान-पान, रहन-सहन के संयम और अनुशासन के द्वारा ही संभव है। श्री हनुमान की व्रज के समान मजबूत, तेजस्वी देह, ब्रह्मचर्य व्रत का पालन व पावनता, इंद्रिय संयम व पुरुषार्थ तन को हष्ट-पुष्ट और स्वस्थ रखने की अहमियत बताता है।
बुद्धि बल - बुद्धि बल व कौशल सफल, सुखी और शांत जीवन के लिए सबसे बड़ी ताकत बन जाता है। क्योंकि बुद्धि के अभाव में शरीर से बलवान और धनवान भी दुर्बल हो जाता है। संदेश है कि ज्ञानवान व दक्ष बनें। श्रीहनुमान भी ज्ञानियों में अग्रणी पुकारे गए हैं। शास्त्र हनुमान के बुद्धि चातुर्य से बाधाओं को दूर करने के अनेक प्रसंग उजागर करते हैं।
देव बल - ईश्वर का स्मरण एक ऐसी शक्ति है, जो अदृश्य रूप में भी शक्ति,  ऊर्जा, एकाग्रता और आत्मविश्वास को बढ़ाने वाली होती है। शास्त्रों में भगवान के मात्र नाम का ध्यान भी देवकृपा करने वाला माना गया है। श्री हनुमान की श्रीराम भक्ति, नाम स्मरण और सेवा इसका श्रेष्ठ उदाहरण है। इस तरह जागते और सोते वक्त देव स्मरण व उपासना आस्था से ऊर्जावान व शक्ति संपन्न बने रहे।
धन बल - शास्त्र पुरुषार्थ  के रूप में सुखी जीवन के लिए अर्थ या धन की अहमियत बताते हैं। जहां धन का अभाव व्यक्ति को तन, मन और विचारों से कमजोर बनाता है। वहीं सेवा, कर्म और समर्पण से धन संपन्नता व्यक्ति के आत्मविश्वास और सोच को मजबूत बनाती है। श्रीहनुमान चरित्र में माता सीता के आशीर्वाद से अष्ट सिद्धियों व नो निधियों को प्राप्त करना इसी बात की ओर संकेत भी करता है। 

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