गृहस्थ जीवन तालमेल की ऐसी कला व खूबी के रूप में भी देखा जाता है, जिसमें अलग-अलग स्वभाव, आदतों, रुचियों, संस्कारों, विचारों के स्त्री-पुरुष आपस में बेहतर गठजोड़ व संतुलन बनाकर जीवन के अहम लक्ष्यों को साधते हैं।
शास्त्रों के मुताबिक गृहस्थी का केन्द्र पतिव्रता स्त्री ही होती है। खासतौर पर बुद्धिमान व सुशील स्त्री घर का सौभाग्य बन जाती है यानी ऐसी स्त्री घर-परिवार के लिए शुभ व लाभ का कारण बनती है, वहीं इसके उलट आचरण दु:ख-दरिद्रता की वजह।
चूंकि गृहस्थी में पुरुष के कार्यों में स्त्री की भी अहमियत होती है। यही वजह है कि धर्म शास्त्रों में गृहस्थ जीवन की सफलता के लिये त्रिवर्ग यानी धर्म, अर्थ व काम को पाने के लिए विवाहित स्त्री के लिए ऐसे दो काम भी जरूरी बताए गए हैं, जिनके बिना खूबसूरती भी बेमानी हो जाती है। अगली तस्वीर पर क्लिक कर जानिए, कौन से हैं ये दो काम -