मर्यादाओं के सबक सिखाने वाले पवित्र ग्रंथ रामचरितमानस में शिव-पार्वती विवाह प्रसंग में शिव को अपना स्वामी बनाने का मन बना चुकी पार्वती को शिव के बजाए भगवान विष्णु से विवाह करने के लिए मनाने के दौरान ऋषिगणों द्वारा महादेव के 8 अवगुण उजागर किए गए। लिखा गया है कि -
तेहि कें बचन मानि बिस्वासा। तुम्ह चाहहु पति सहज उदासा॥
निर्गुन निलज कुबेष कपाली। अकुल अगेह दिगंबर ब्याली॥
इसका सार है कि ऋषिगण माता पार्वती को शिव के बारे कहते हैं कि - " नारदजी के वचनों पर विश्वास कर तुम ऐसा पति चाहती हो जो (शिव) स्वभाव से ही गुणहीन, निर्लज्ज, बुरे वेश वाला, नर-कपालों की माला पहननेवाला, कुलहीन, बिना घर-बार का, नंगा और शरीर पर साँपों को लपेटे रखनेवाला है।
इस बात का जवाब माता पार्वती ने दिया है कि -
महादेव अवगुन भवन बिष्नु सकल गुन धाम।
जेहि कर मनु रम जाहि सन तेहि तेही सन काम॥
माना कि महादेव अवगुणों के भवन हैं और विष्णु समस्त सद्गुणों के धाम हैं, पर जिसका मन जिसमें रम गया, उसको तो उसी से काम है॥