महादेव महायोगी के रूप में पूजनीय हैं। माना जाता है कि उनका योग स्वरूप ही संसार के सुख और आनंद की वजह है। वहीं, रौद्र रूप में भगवान शिव प्रलंयकारी बन बुरी वृत्त्तियों व कामनाओं को कामदेव की तरह भस्म कर उनको जगत के लिए मंगलकारी बना देते हैं।
इस तरह मंगलकारी व विनाशक दोनों ही स्वरूपों में भगवान शिव की अपार शक्ति व गुण उजागर होते हैं। किंतु सांसारिक नजरिए से कोई कितना ही गुणी हो, उसमें कुछ न कुछ कमजोरियों भी मौजूद होती हैं। क्या आप जानते हैं यही बात महादेव पर भी लागू होती हैं। क्योंकि धर्मग्रंथों में महादेव होने पर भी उनके स्वरूप व चरित्र में कुछ कमियां भी उजागर की गई हैं। हालांकि शिव की अपरंपरा महिमा के आगे ये कमियां भी गौण हो जाती हैं या यूं कहें कि ये महादेव के ये अवगुण भी जगत के लिए गुण व ज्ञान का खजाना बनकर शुभ व मंगलकारी साबित होते हैं।
हिन्दू धमग्रंथ रामचरितमानस में भगवान शिव के ऐसे ही 8 अवगुण बताए गए हैं, जो शिव के निरालेपन को साबित कर शिव भक्ति के आनंद को और भी बढ़ा देते हैं। अगली स्लाइड पर पहुंच जानिए आखिर कौन सी है देवों के देव की ऐसी कमियां -