श्रीहनुमान की मूर्तियों में उनकी पूंछ नीचे की ओर जमीन से लगी या ऊपर की ओर उठी दिखाई देती है। असल में पूंछ की स्थिति व अलग-अलग शारीरिक मुद्राओं वाली हनुमानजी की मूर्तियां विशेष स्वरूप व प्रभाव को उजागर करती है।
इनके मुताबिक भक्त या दास हनुमान की पूंछ नीचे की ओर लटकी होती है और वे हाथ जोड़े या भक्ति की मुद्रा में होते हैं। हनुमान की ऐसी पूंछ पर दृष्टि का का असर भक्त के मन से आलस्य व दरिद्रता को दूर कर चेतना व ऊर्जा भरने वाला माना गया है।