हिन्दू धर्म ग्रंथ श्रीमदभगवद्गीता में ईश्वर के विराट स्वरूप का वर्णन है। द्वापर युग में महाप्रतापी अर्जुन को इस दिव्य स्वरूप के दर्शन कराकर कर्मयोगी भगवान श्रीकृष्ण ने कर्मयोग के महामंत्र द्वारा अर्जुन के साथ संसार के लिए भी सफल जीवन का रहस्य उजागर किया।
भगवान का विराट स्वरूप ज्ञान शक्ति और ईश्वर की प्रकृति के कण-कण में बसे ईश्वर की महिमा ही बताता है। माना जाता है कि भगवान श्रीकृष्ण और अर्जुन, नर-नारायण के अवतार थे और महायोगी, साधक या भक्त ही इस दिव्य स्वरूप के दर्शन पा सकता है। किंतु गीता में लिखी एक बात यह भी संकेत करती है सांसारिक जीवन में साधारण इंसान के लिए ऐसा तप करना कठिन हो तो उसे हर रोज पवित्र गीता से जुड़ा क्या उपाय करना चाहिए, जिसका शुभ प्रभाव ज़िंदगी के लिए फायदेमंद हो। दूसरे शब्दों में गीता में ही लिखी एक विशेष बात कलियुग में भगवान जगदीश की विराटता देखने का तरीका भी उजागर करती है। अगली स्लाइड पर पहुंच जानिए यह खास उपाय -