गणित व खगोल विज्ञान की अद्भुत जानकार दुनिया की पुरानी सभ्यताओं में एक अमेरिका की माया सभ्यता की मान्यताओं व कालगणना के मुताबिक साल 2012 के माह दिसंबर में दुनिया की तबाही की आखिरी घड़ी है। इस वक्त के नजदीक आने के साथ दुनिया खत्म होने के दिन और तबाही की वजहों को लेकर कई दावे और अनुमान सामने आते रहे हैं। इनमें किसी ग्रह के पृथ्वी के टकराने, कभी सूर्य की ऊर्जा व किरणों से पैदा सौर तूफान व जल प्रलय के दावे भी प्रमुख हैं। पिछले कुछ सालों में देश-दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में भारी बारिश, भूकंप व तूफान जैसी कुदरती घटनाओं से हुई तबाही ऐसी बातों को और बल देती हैं कि क्या वाकई इस साल माया सभ्यता की भविष्यवाणी के मुताबिक 21 दिसंबर 2012 को दुनिया का विनाश हो जाएगा?
इन दावों का पुख्ता आधार खोजने की कोशिश करें तो खासतौर पर रहने, जीने यहां तक कि मृत्यु को भी सुधारने के सबक से भरे हिन्दू धर्मग्रंथों में लिखे प्रलय के संकेतों के आगे दिसंबर 2012 में कयामत के दिन का दावा कमजोर साबित होता है।
इस संबंध में हिन्दू धर्मग्रंथ श्रीमद्भागवद् महापुराण में लिखी प्रलय के दौरान होने वाली घटनाएं व बनने वाले हालातों को जान आप स्वयं भी अंदाजा लगा सकते हैं कि विनाश के सारे दावों में कितना सच है? अगली तस्वीर पर क्लिक कर जानिए कि अगर दिसंबर में ही कयामत का दिन होता तो पहले कौन सी घटनाएं घटतीं -