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टारगेट से भी ज्यादा सक्सेस पाने के 4 सूत्र हैं श्रीहनुमान के ये 4 अद्भुत काम

धर्म डेस्क. उज्जैन | Nov 30, 2012, 15:24PM IST
टारगेट से भी ज्यादा सक्सेस पाने के 4 सूत्र हैं श्रीहनुमान के ये 4 अद्भुत काम
आज कई युवाओं की संघर्ष भरी ज़िंदगी की एक बड़ी वजह लक्ष्य का अभाव भी है। इससे तमाम कोशिशों के बाद भी कई मौकों पर वह नाकामी का सामना करते हैं। हालांकि लक्ष्य न साधने या एकाग्रता भंग होने का कारण कभी-कभी बुरा वक्त व हालात भी होते हैं। लेकिन बुरे वक्त के थपेड़ों से जूझकर जो मकसद को पा ले, ऐसा चरित्र ही दुनिया में प्रेरणा बन जाता है। 
 
हिन्दू धर्म शास्त्रों में रुद्रावतार श्रीहनुमान का चरित्र शक्ति, ऊर्जा, बल के सही उपयोग और मजबूत इरादों से लक्ष्य भेदने के सूत्र ही सिखाता है। जानिए रामायण में श्रीहनुमान से जुड़े 4 अद्भुत प्रसंगों के जरिए लक्ष्य बनाने व उस तक पहुंचने के 4 ऐसे ही अहम सूत्र - 
 
रावण द्वारा सीताहरण के बाद श्रीहनुमान ने माता सीता की खोज में लंका पहुंचते तक कई मुश्किलों का सामना किया। लेकिन इस दौरान अपने लक्ष्य को लेकर वह इतने दृढ़ थे कि उसको पाने के लिए उन्होंने बुद्धि, बल और साहस से सारी मुसीबतों को मात दी।  जानिए इस दौरान आए 4 प्रसंगो से क्या सिखाते हैं श्रीहनुमान - 
 
मैनाक पर्वत - दरअसल, मैनाक पर्वत कर्मशील को विश्राम के लालच का प्रतीक है, ऐसा भाव लक्ष्य की ओर बढ़ते हुए कहीं न कहीं आता है। श्रीहनुमान द्वारा इसे ठुकराकर कर आगे बढऩा यही संदेश देता है कि लक्ष्य को पाना है तो हमेशा गतिशील रहें। 
सुरसा- सुरसा उन रुकावटों व उतार-चढ़ाव का प्रतीक है, जो लक्ष्य पाने में अड़चनें डालते हैं। किंतु श्रीहनुमान ने अपने आकार को बढ़ा-छोटा कर यही संदेश दिया कि हालात के मुताबिक ढल कर लक्ष्य से ध्यान न हटाएं। 
सिंहिका - मकसद को पाने के लिए ऐसा वक्त भी आता जब इंसान के मन में दूसरों की सफलता से द्वेष या ईर्ष्या के भाव पैदा होते हैं, जिससे लक्ष्य पाना मुश्किल हो सकता है। सिंहिका ऐसे ही बुरे भावों की प्रतीक है, जिसे मात देकर श्रीहनुमान ने यही सिखाया कि मकसद को पाने के लिए ऐसी सोच से दूर हो जाना चाहिए। 
लंका और लंकिनी - लंका और उसकी रक्षक लंकिनी असल में खूबसूरती, मोह और आसक्ति का रूप है, जिसके कारण कोई भी संत और तपस्वी भी लक्ष्य से भटक सकता है। किंतु श्री हनुमान लंकिनी को मारकर और लंका के सौंदर्य से प्रभावित हुए बगैर सीता की खोज कर ही दम लिया। साथ ही लंका में आग लगाकर यह सबक भी दिया कि लक्ष्य को पाने के लिए प्रलोभन, मोह, आकर्षण से दूर रहना ही हितकर होता है। 
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