Home» Jeevan Mantra »Dharm »Gyan » Dharm_take This 9 Steps Of Devotion In Hectic Period Of Work

PICS: ज्यादा व्यस्त रहते हैं तो इन 9 खास तरीकों से भी कर सकते हैं भक्ति

धर्म डेस्क. उज्जैन | Dec 04, 2012, 18:39PM IST
1 of 2
आज तेज रफ्तार की जिंदगी में शांति के लिए भौतिक सुख-सुविधा जैसे घर, भोजन, वस्त्र को ही अक्सर अहम मान लिया जाता है। किंतु यह सभी पाने के बाद भी कई लोग मानसिक सुकून के लिए बेचैन देखे जाते हैं। 
आधुनिक जिंदगी की इस समस्या का एक हल धर्मग्रंथों में भी मिलता है। धर्म के नजरिए से किसी व्यक्ति के पास दौलत और सुख-सुविधा हो, बड़ा कुनबा हो, सामाजिक रुतबा हो, वह स्वयं गुणी और बुद्धिमान हो, वह दूसरों की भलाई भी करता हो, लेकिन अगर वह भगवान के स्मरण या भक्ति से दूर है तो कभी भी वास्तविक खुशी नहीं पाएगा। फिर चाहे ऊपरी तौर पर वह कितना ही खुश या सहज दिखाई दे। 
धर्मग्रंथों में सांसारिक व्यक्ति को अंदर और बाहरी दोनों ही तरह से शांति और सुख देने वाला ईश्वर की भक्ति का ऐसा ही उपाय बताया गया है - नवधा भक्ति। असल में, यह  धार्मिक और व्यावहारिक रूप से प्रकृति हर कण में बसे भगवान की अनूठी और अद्भुत भक्ति के नौ तरीके हैं। अगली तस्वीर पर क्लिक कर सरलता से जानिए भगवान की भक्ति के 9 खास तरीके और व्यावहारिक अर्थ -  
 
1 संतो का सत्संग - संत यानि सज्जन या सद्गुणी की संगति। 
2 ईश्वर के कथा-प्रसंग में प्रेम - देवताओं के चरित्र और आदर्शों को स्मरण और जीवन में उतारना।
3 अहं का त्याग - अभिमान, दंभ न रखना। क्योंकि ऐसा भाव भगवान के स्मरण से दूर ले जाता है। 
4 कपट रहित होना - दूसरों से छल न करने या धोखा न देने का भाव। 
5 ईश्वर के मंत्र जप - भगवान में गहरी आस्था। जो इरादों को मजबूत बनाए रखता है। 
6 इन्द्रियों का निग्रह - स्वभाव, चरित्र और कर्म को साफ रखना। 
7 प्रकृति की हर रचना में ईश्वर देखना - दूसरों के प्रति संवेदना और भावना रखना। भेदभाव, ऊंच-नीच से परे रहना। 
8 संतोष रखना और दोष दर्शन से बचना - जो कुछ आपके पास है उसका सुख उठाएं। अपने अभाव या सुख की लालसा में दूसरों के दोष या बुराई न खोजें। इससे आप मन में वैचारिक दोष से सुखी होकर भी दु:ख मिलता है। जबकि संतोषी और सद्भाव से ईश्वर और धर्म में मन लगता है। 
9 ईश्वर में विश्वास - भगवान में अटूट विश्वास रख दु:ख हो या सुख हर स्थिति में समान रहना। स्वभाव को सरल रखना यानी किसी के लिए बुरी भावना न रखना। 
धार्मिक नजरिए से स्वभाव, विचार और व्यवहार में इस तरह के गुणों को लाने से न केवल ईश्वर की कृपा मिलती है बल्कि सांसारिक सुख-सुविधाओं का वास्तविक आनंद मिलता है। 
आपके विचार
 
अपने विचार पोस्ट करने के लिए लॉग इन करें

लॉग इन करे:
या
अपने बारे में बताएं
 
 

दिखाया जायेगा

 
 

दिखाया जायेगा

 
कोड:
2 + 3

 
विज्ञापन

बड़ी खबरें

रोचक खबरें

विज्ञापन

बॉलीवुड

स्पोर्ट्स

जोक्स

पसंदीदा खबरें

फोटो फीचर

 
Email Print Comment