
5th RESOLUTION FOR 2013 : इन 5 अंगों की सेहत तय करेगी उम्र व सफलता

हर धर्म में सुखी जिंदगी के लिए संयम की अहमियत बताई गई है। खासतौर पर अक्सर धर्म उपदेशों और प्रवचनों में इन्द्रिय सुखों और संयम के बारे में सुना या पढ़ा जाता है। दरअसल, संयम का सरल अर्थ मन को काबू करने से होता है। मन का संबंध इंद्रियों से होता है। इसलिए जैसी मनोदशा होती है, बाहरी तौर पर इंद्रियों पर भी वैसा ही असर दिखाई देता है।
शास्त्रों में लिखा भी गया है कि -
इन्द्रियान्येव संयम्य तपो भवति नाऽन्यथा ।
यानी इन्द्रिय संयम से ही तप संभव है, किसी अन्य तरीके से नहीं।
मानव शरीर में भी पांच ज्ञानेन्द्रियां हैं। यह हैं - आंख, कान, नाक, जीभ और त्वचा। इनसे ही कोई व्यक्ति सौंदर्य, रस, गंध, स्पर्श, स्वाद महसूस करता है। इन इन्द्रियों पर भी व्यक्ति का जीवन, चरित्र और व्यक्तित्व का विकास निर्भर होता है। इसलिए हर इंसान के लिए जरूरी है कि बाहरी तौर पर भी इंद्रियों की क्रियाओं पर नियंत्रण रखें।
यहां जानिए इंद्रियों को वश में रखने व बुरे असर से बचाने के सरल तरीके-
आंख - इनका उपयोग सुंदर ओर मनोरम दृश्यों को देखने में करें। थकान से बचाएं और उचित आराम दें।
जीभ - इसका उपयोग मात्र स्वाद के लिए ही नहीं, बल्कि इससे मधुर वाणी और सच बोलने का भी अभ्यास करें।
कान - बुरी बातों को सुनने से बचें।
नाक - इस पर गंध ही नहीं सांस भी निर्भर है, जो जिंदगी के लिए जरूरी है। इसलिए जहां तक संभव हो साफ वातावरण को महत्व दें। प्राणायाम करें।
त्वचा - यह केवल चीजों का नहीं भावनाओं के एहसास का भी जरिया है। इस पर खूबसूरती भी निर्भर करती है। इसलिए इसकी सुरक्षा और स्वच्छता का खास ध्यान रखें।
इस तरह इन पांच इंद्रियों के संयम पर ही शारीरिक, मानसिक, आध्यात्मिक, सामाजिक एवं आर्थिक सुख टिके होते हैं। इसलिए लंबी, कामयाबी और सुखी जिंदगी के लिए थोड़ी देर मन पर काबू करने पर भी ध्यान लगाएं।









